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भारत-श्रीलंका द्विपक्षीय व्यापार को लगे पंख

भारत-श्रीलंका मु्क्त व्यापार समझौते (एफटीए) ने दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्तों में पंख लगा दिए हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार लगातार लम्बी छलांग लगा रहा है। दोनों पड़ोसी मुल्कों के बीच उपयरुक्त समझौता एक मार्च 2000 को हुआ था और यह बीती मार्च को पूरी तरह लागू हो गया। इस दौरान द्विपक्षीय व्यापार चार गुना बढ़ चुका है। उद्योग और वाणिज्य मंडल फिक्की के एक ताजा अध्ययन में यह तथ्य उभर कर सामने आया है। इसके साथ ही प्रमुख भारतीय कंपनियों ने जिनमें टाटा, इंडियन आयल कॉरपोरशन, अपोलो हास्पिटल, एलआईसी, अंबुजा सीमेंट, सिएट टायर्स, जेट एयरवेज, सहारा, अशोक लेलैंड शामिल हैं, श्रीलंका में तगड़ा निवेश भी किया है। टाटा समूह की तीन कंपनियां क्रमश: ताज होटल, विदेश संचार निगम लिमिटेड (वीएसएनएल), वाटावाला टी ने श्रीलंका का हाल के सालों में रुख किया है। अध्ययन के मुताबिक, एफटीए के बाद श्रीलंका जापान की तुलना में भारत से अधिक आयात करता है। श्रीलंका के कुल आयात का करीब 17 प्रतिशत हिस्सा भारत से आता है। सबसे गौर करने लायक बात यह है कि एफटीए के लागू होने बाद दोनों देशों के बीच आपसी व्यापार 27 फीसदी की सालाना रफ्तार से आगे बढ़ता जा रहा है। समझौते के बाद भारत भी श्रीलंका से विभिन्न उत्पादों का आयात काफी बड़ी मात्रा में करने लगा है। पहले भारत के कुल आयात में श्रीलंका का 61वां स्थान था। 2006-07 तक पहुंचते-पहुंचते यह हो गया 34 वां स्थान। पहले भारत से श्रीलंका को होने वाले कुल जमा निर्यात का 50 प्रतिशत हिस्सा कपड़े,आटो उत्पाद, सब्जियों, फार्मा उत्पाद और मशीनरी का रहता था।

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