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बीमारियों का इलाज गर्भावस्था में हो

एम्स, नई दिल्ली के फीटल मेडिसीन विभागाध्यक्ष डा. दीपिका डेका ने बताया है कि गर्भावस्था के दौरान ही कई प्रकार की जन्मजात बीमारियों की पहचान और उसका निदान संभव है। उन्होंने कहा कि हीमोफीलिया, थैलेसिमिया, डाउन सिन्ड्रोम और हृदय रोग की पहचान गर्भावस्था के दौरान ही हो सकती है। कुछ बच्चे अविकसित अंग के साथ ही जन्म लेते हैं। ऐसे जन्मजात रूप से बीमार बच्चे समाजिक, आर्थिक और परिवार के लिए बोझ बन जाते हैं। जांच में जब यह साबित हो जाए कि बच्चे की बीमारी लाइलाज है तो उसके माता-पिता की काउंसलिंग होनी चाहिए।ड्ढr ड्ढr उन्हें यह बताया जाना चाहिए कि उनका बच्चा कभी भी ठीक नहीं होगा। माता-पिता अपने बच्चे की स्थिति से अवगत होकर चाहें तो उसका गर्भपात करा सकते हैं। उन्होंने बताया कि न्युरल ट्यूब डिफेक्ट से ब्रन की खोपड़ी का विकास नहीं होता है। गर्भावस्था में उचित इलाज से इस बीमारी को रोका जा सकता है। इससे स्पाइन भी अविकसित रहता है। गर्भावस्था के दौरान पहली तिमाही में बीमारी की जांच हो जाने पर 20 सप्ताह के अन्दर गर्भपात कराया जा सकता है। उन्होंने बताया कि कुछ बच्चे जन्मजात रूप से हृदय रोग से पीड़ित होते हैं। ऐसे बच्चों का प्रसव विशेष अस्पताल में कराने का परामर्श दिया जाना चाहिए जिससे कि जच्चा-बच्चा की जान बचायी जा सकती है। ऐसे में प्रसव के बाद होनेवाली कई बीमारियों का निदान गर्भावस्था में ही किया जा सकता है।

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