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भाजपा शासित राज्यों में बगावत बेकाबू

बिहार की बगावत अभी थमी भी नहीं है कि भाजपा शासित राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तराखंड में भी बगावती सिर उठा रहे हैं। राजस्थान का बवाल तो दिल्ली दरबार तक पहुंच चुका है। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और प्रदेश अध्यक्ष ओम माथुर एक दूसर की कार्यशैली से संतुष्ट नहीं हैं। इसीलिये वहां संगठन और सरकार के बीच तालमेल नहीं बैठ रहा है। राजे शुरू से ही माथुर की नियुक्ति की विरोधी थीं। लेकिन आलाकमान के आगे उनकी नहीं चली। अब दोनों में छोटी-छोटी बातों को लेकर टकराव हो रहा है। दोनों ही नेता पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह और पार्टी के पीएम इन वेटिंग आडवाणी से मिलकर अपनी शिकायत दर्ज कर चुके हैं। माथुर पूर्व अध्यक्ष महेश शर्मा की तरह राजे के यसमैन नहीं हैं। माथुर बतौर गुजरात प्रभारी नरन्द्र मोदी जसे व्यक्ति के साथ तालमेल बिठा चुके हैं। उन्हें संघ का भी समर्थन मिला हुआ है। इसी तरह उत्तराखंड में भी मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी के खिलाफ पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोशियारी ने मोर्चा खोल रखा है। संघ के राज्य अधिकारी कोशियारी के साथ हैं। इन दोनों खेमों की खींचतान का असर यह हुआ है कि हाल में स्थानीय निकाय के चुनावों में भाजपा का सूपड़ा साफ हो गया है। लगभग 600 सीटों में उसे मात्र 15सीट ही मिलीं। भाजपा उन जगहों पर भी हारी जहां उसका पारम्परिक जनाधार था। एक दूसर पर दबाव बनाने के लिये खंडूरी और कोशियारी दिल्ली के चक्कर काट रहे हैं। पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी भी दोनों के बीच बचाव का काम कर रहे हैं। लेकिन नतीजा सिफर ही है। मध्यप्रदेश भी विधानसभा चुनाव के मुहाने में बैठा है। भाजपा के दिग्गज नेता कैलाश जोशी मंत्रियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा चुके हैं। ऐसे नेताओं को टिकट न देने की भी वह वकालत कर चुके हैं। हालत यह है कि राज्य के चप्पे चप्पे के कार्यकताओं की जानकारी रखने वाले वरिष्ठ सांसद प्यार लाल खंडेलवाल सहित कई और बड़े नेताओं को चुनाव की तैयारी के लिये13 से शुरू होने वाली राज्य कार्यकारणी की बैठक में नहीं बुलाया गया है।ड्ढr

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