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भंग इंटरमीडिएट काउंसिल में करोड़ों का घोटाला!

भंग इंटरमीडिएट काउंसिल में करोड़ों रुपए के एक नए घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। मामला इंटरमीडिएट परीक्षा में प्रश्नों पत्र की छपाई का है। इस घोटाले का भंडाफोड़ तब हुआ जब पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष प्रश्न पत्रों की छपाई पर करोड़ों खर्च का अंतर उजागर हुआ हैं। मजेदार तथ्य यह है कि पिछले साल की तुलना में इस वर्ष परीक्षार्थियों की संख्या भी अधिक रही और प्रश्न पत्र छपाई की गुणवत्ता बरकरार रही लेकिन प्रश्न पत्र छपाई पर खर्च काफी कम हुआ। यही नहीं जिस प्रस ने पिछले साल प्रश्न पत्र की छपाई की थी उसी प्रस ने इस वर्ष भी प्रश्न पत्र की छपाई की है।ड्ढr ड्ढr बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के अध्यक्ष प्रो. ए. के. पी. यादव ने कहा कि पूर मामले को देखा जा रहा है। मानव संसाधन मंत्री हरिनारायण सिंह का कहना है कि उन्हें इस घोटाले की जानकारी नहीं है। लेकिन मानव संसाधन विभाग के प्रधान सचिव अंजनी कुमार सिंह ने स्वीकार किया कि इस वर्ष प्रश्न पत्र की छपाई पर सिर्फ 61 लाख 20 हजार रुपए ही खर्च हुए जबकि पिछले साल 3 करोड़ 76 लाख रुपए खर्च हुए। वर्ष 2007 में इंटरमीडिएट परीक्षा में कुल 4 लाख 60 हजार परीक्षार्थी शामिल हुए थे और प्रश्न पत्रों की छपाई पर कुल खर्च 3 करोड़ 76 लाख रुपए हुए थे। जबकि इस वर्ष परीक्षा में कुल 5 लाख 10 हजार परीक्षार्थी शामिल हुए हैं और प्रश्न पत्र छपाई पर खर्च हुए मात्र 61 लाख 20 हजार रुपए। इससे स्पष्ट है कि गोपनीयता के बहाने प्रश्न पत्रों की छपाई परं पिछले कई वर्षो से करोड़ों रुपए के घोटाले होड्ढr रहे थे।ड्ढr ड्ढr वर्ष 1में इंटरमीडिएट परीक्षा में 2 लाख 36 हजार 734 परीक्षार्थी शामिल हुए और प्रश्न पत्रों की छपाई पर खर्च हुए एक करोड़ 33 लाख 10 हजार 64 रुपए, वर्ष 2000 में 2 लाख हजार 421 परीक्षार्थियों पर एक करोड़ 77 लाख 76 हजार 414 रुपए, वर्ष 2001 में 2.54 लाख परीक्षार्थियों पर 2 करोड़ 2 लाख रुपए, वर्ष 2002 में 2.42 लाख परीक्षार्थियों पर एक करोड़ लाख रुपए, वर्ष 2003 में 2.57 लाख परीक्षार्थियों पर 2 करोड़, 3लाख रुपए, वर्ष 2004 में 2.43 लाख परीक्षार्थियों पर 2 करोड़ 43 लाख रुपए, वर्ष 2005 में 3.25 लाख परीक्षार्थियों पर 2 करोड़ लाख रुपए, वर्ष 2006 में 3.40 लाख परीक्षार्थियों पर 3 करोड़ 17 लाख रुपए खर्च हुए। अब सवाल यह है कि जब पिछले साल की तुलना में इस वर्ष परीक्षार्थियों की संख्या अधिक रही तो प्रश्न पत्रों की छपाई परं कम खर्च कैसे हुआ? पिछले एक साल में भंग इंटरमीडिट काउंसिल में कई घोटाले उजागर हुए हैं लेकिन सरकार ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की है।ं

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  • Web Title: भंग इंटरमीडिएट काउंसिल में करोड़ों का घोटाला!