class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

‘बहरी बुआ..’ ने दिया सुधार का संदेश

सजा देने के बजाय सुधारने का प्रयास किया जाना चाहिए। यह संदेश नाटक ‘बहरी बुआ का इंसाफ’ ने दिया। इसका मंचन मंगलवार को ऋतिका कला संगम की ओर से आलमबाग के बड़ा बरहा में अमिता उद्गाता के निर्देशन में किया गया।ड्ढr यह प्रस्तुति राष्ट्रीय नाटय़ विद्यालय के सहयोग से आयोजित बाल नाटय़ कार्यशाला में तैयार की गई। इसमें दर्शाया गया कि मजबूरी का मारा एक व्यक्ित सुनार की मोहरं चुराने के प्रयास में पकड़ा जाता है। सेठ अड़ जाता है कि इसने मोहरं चुराकर गायब कर दीं। ऐसे में गाँव की प्रधान बहरी बुआ कहती हैं कि जब मोहरें चोरी ही नहीं हुई तो सजा कैसी ? इसके साथ ही नाटक दहेा निषेध का भी संदेश देता है। गीत ‘छोड़ के बाबुल का अंगना, चली आज बिटिया हमारी’ और ‘हमार गुरु हैं बड़े महान, करूँ क्या इनकी महिमा बखान’ उल्लेखनीय रहे।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: ‘बहरी बुआ..’ ने दिया सुधार का संदेश