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.तो डाउन चल रही बैटरी चार्ज हो जायेगी

सत्ता की आंच से पिघल चुकी भाजपा संघर्ष का भी माद्दा रखती है, बहुत दिनों के बाद देखने को मिला। विपक्ष के रूप में पिछले तकरीबन ढाई साल से भाजपा सरकार के खिलाफ बयानबाजी और हल्के-फुल्के ढंग से सड़कों पर धरना-प्रदर्शन कर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ले रही थी। लेकिन एसे छोटे-मोटे आंदोलनों का कोई दूरगामी असर नहीं पड़ता। इस बार भाजपा ने लंबी पारी खेलने का मन बनाया है। हालांकि यह एक कठिनसाध्य योजना है। 12 दिन के आंदोलन में कार्यकर्ता सड़कों पर उत्साह के साथ प्रदर्शन करने में कामयाब हो गये, तो आगामी चुनावों के लिए डाउन चल रही भाजपा की बैटरी चार्ज हो जायेगी। संघर्ष और संगठन के बूते सत्ता पानेवाली भाजपा पिछले छह-सात साल से संघर्ष करना भूल गयी थी। गाहे-बगाहे जरूर राज्य के कहीं किसी इलाके में धरना-प्रदर्शन दिखायी पड़ जाता था। लेकिन एसे छिटपुट आंदोलन में न तो कोई तो धार दिखी और न ही कोई उत्साह। इस बार भाजपा के अंदर जरूर ऊरा और उत्साह दोनों दिखायी दे रहा है। पार्टी के रणनीतिकार राज्य भर से राजधानी में कार्यकर्ताओं को बुलाकर अपने आंदोलन को राज्यव्यापी प्रोजेक्शन दिलाने में सफल रहे। महंगाई और नागरिक समस्याओं को लेकर जनता त्रस्त है। केंद्र और राज्य की सरकार मंहगाई रोक पाने में फेल रही है। एसे में विपक्ष इन मुद्दों को लेकर सड़क पर उतर, तो जनता की सहानुभूति तो रहती ही है। विपक्षी धर्म का तकाजा भी यही है। राजनीतिक दल अपने लाभ-हानि के लिए आंदोलन-संघर्ष करते रहे हैं। बावजूद इसके भाजपा का यह आंदोलन सही वक्त पर उठाया गया कदम है।

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