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हड़तालियों से वार्ता में सरकार नहीं कर रही पहल

हड़तालियों से सार्थक वार्ता नहीं कर सरकार लाखों उच्च शिक्षा के छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। 26 दिनों से सूबे के कॉलेजों में ताले लटके हैं। वहीं विश्वविद्यालयों में तो 32 दिनों से तालेबंदी है। पटना विश्वविद्यालय में तो हड़ताल के 51 दिन पूर हो चुके हैं। अब तक तीन बार शिक्षा विभाग व कर्मचारियों के बीच वार्ता हुई है लेकिन कर्मचारियों की मांगों पर गंभीरतापूर्वक एक बार भी विचार नहीं किया गया। शनिवार को भी कर्मचारियों को वार्ता का आश्वासन सरकार की तरफ से मिला था लेकिन उन्हें वार्ता के लिए नहीं बुलाया गया।ड्ढr ड्ढr सरकार के रवैये के खिलाफ अब कर्मचारी जोरदार प्रदर्शन करंगे। 2ाुलाई को बिहार राज्य विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय कर्मचारी महासंघ के बैनर तले कर्मचारियों का विशाल प्रदर्शन होगा। इस संबंध में महासंघ के संरक्षक राजेंद्र मिश्र, अध्यक्ष डा. विमल प्रसाद, उपाध्यक्ष डा. धनंजय प्रसाद सिंह, संयुक्त मंत्री रामशंकर मेहता व कृष्णा सिंह और रोहित कुमार ने कहा कि अब कर्मचारी आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं और इस बार का प्रदर्शन ऐतिहासिक होगा। उन्होंने कहा कि 24 जुलाई को हुई वार्ता में शिक्षा मंत्री ने शनिवार को वार्ता का आश्वासन दिया था लेकिन किसी को छात्रहित की परवाह नहीं है।ड्ढr ड्ढr उन्होंने कहा कि पूर समझौते का राज्यादेश निर्गत नहीं हो जाता तब तक कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर डटे रहेंगे। मुख्यमंत्री द्वारा भी छात्र हित में अनिश्चितकालीन हड़ताल को समाप्त कराने का प्रयास नहीं होना दर्शाता है कि सरकार की मंशा हड़ताल को लंबा खींचने की है। वहीं बिहार राज्य विवि कर्मचारी महासंघ के महासचिव मुकेश कुमार व उपाध्यक्ष उमेश प्रसाद का कहना है कि इस हड़ताल के बाद भी अगर सरकार की नींद नहीं खुलती है तो माना जाना चाहिए कि सरकार उच्च शिक्षा के विकास के प्रति गंभीर नहीं है।

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