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स्तनपान करने वाले बच्चे कम बीमार पड़ते हैं

डॉक्टरों का कहना है कि प्रसव के बाद स्तनपान कराने से नवजात मृत्यु दर को 22 प्रतिशत कम किया जा सकता है। जन्म से छह माह तक सिर्फ मां का दूध पीनेवाले बच्चों में रोग से लड़ने की क्षमता विकसित होती है। ऐसे बच्चे कम बीमार पड़ते है। बीपीएनआई द्वारा स्तनपान सप्ताह आरम्भ होने पर शुक्रवार को आईएमए हॉल में उद्घाटन समारोह का आयोजन किया गया। आईएपी सह बीपीएनआई के अध्यक्ष डा.अरुण कुमार ठाकुर ने इस मौके पर बताया कि राज्य में स्तनपान करानेवाली माताओं की संख्या घट रही है। नए सव्रेक्षण के अनुसार राज्य अंतिम पायदान पर खड़ा हो गया है। इसके पूर्व बिहार 16 वें स्थान पर था।ड्ढr ड्ढr उन्होंने बताया कि यह देखा गया है कि एक माह तक 57 प्रतिशत जबकि प्रसव के चार-पांच माह बाद सिर्फ सात फीसदी माताएं ही पूर्णत: स्तनपान कराती है। डा.एस.पी.श्रीवास्तव ने बताया कि ओलम्पिक खेल को देखते हुए स्तनपान सप्ताह का थीम सपोर्ट ग्रुप रखा गया। स्तनपान के बार में अधिनियम भी है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र में जहां माताओं को मातृत्व लाभ दिया जाता है वहीं पर असंगठित क्षेत्र की महिलाओं के लिए सरकार की कोई योजना नहीं है। स्त्री रोग विशेषज्ञ डा.मंजू गीता मिश्रा ने बताया कि स्तनपान कराने के लिए परिवार, संबंधी और समाज द्वारा सहायता समूह के रूप में काम करना चाहिए। डा.एस.ए.कृष्णा ने मां के दूध को सोने से भी महंगा बताया । सामान्य प्रसव के एक और सिजेरियन के छह घंटे के अन्दर स्तनपान कराना चाहिए। कार्यक्रम को यूनिसेफ के डा.ओ.पी.कंसल, लायन्स क्लब की मीना सिंह और इनरह्वील क्लब की सरिता ने संबोधित किया। उधर आईएपी,पटना ब्रांच द्वारा पीएमसीएच में स्तनपान जागरुकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कॉलेज के प्राचार्य डा.सी.बी.चौधरी ने इसका उद्घाटन किया जबकि डा. एस.आर. चौधरी, डा. नीलम वर्मा, डा. एन.पी. नारायण, डा. जे.पी.एन. वर्णवाल, डा.गोपाल शरण और डा.अलका सिंह ने संबोधित किया।

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