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मेरे खिलाफ राजनीतिक साजिश : प्रेम गुप्ता

ेन्द्रीय मंत्री प्रम गुप्ता ने रलवे होटल मामले में उनका नाम घसीटे जाने को सोची-समझी राजनीतिक साजिश बताया है।ड्ढr उन्होंने कहा कि जिस जमीन से रलवे के होटल मामले को जोड़ा जा रहा है उसमें वे कहीं नहीं है। दोनों मामलों के बीच ढाई साल से अधिक का फासला है। जिस ‘दि लाइट मार्केटिंग कंपनी प्राइवेट लि.’ की चर्चा की जा रही है, वह उन्होंने 10 जून 1ो बनाई और वह पॉकेट कंपनी नहीं है। उसका आथराइज कैपिटल दो करोड़ रुपए से अधिक का है और पेड-अप कैपिटल 1.रोड़ रुपए का है। अब उनके परिवार की कंपनी में उनकी पत्नी निदेशक नहीं होंगी तो कौन होगा? वर्ष 2000 तक वे खुद कंपनी में डायरक्टर थे।ड्ढr ड्ढr बिहार ने उन्हें तीन बार राज्यसभा में भेजा है, ऐसे में उनका भी कुछ फर्ज बनता है और यहां जमीन खरीदकर घर बनाने का सपना है। जिस जमीन का जिक्र किया जा रहा है वह उन्होंने 25 फरवरी 2005 को 1.61 करोड़ रुपए में खरीदी जो कि मूल कीमत से अधिक है। यही नहीं उन्होंने इसके लिए 28 लाख रुपए स्टाम्प डय़ूटी भी चुकाई। सारा मामला आयकर विभाग से ओके है। उन्होंने होटल औने-पौने दाम में देने के आरोप को भी खारिज किया और कहा कि जो सूचना उन्होंने रलवे बोर्ड से ली है। उसके अनुसार मार्च 2004 में ही नीतीश कुमार के रल मंत्री रहते पॉलिसी बनी और उसी के आधार पर लालू प्रसाद के रलमंत्री बनने के काफी पहले रलवे और आईआरसीटी में एमओयू हुआ। उसके बाद रांची स्थित होटल 15 साल के लीज पर सुजाता कंपनी को दिया गया। इसके लिए 14 मई 2007 को टेंडर किया गया और इसकी सूचना उस समय 105 अखबारों में प्रकाशित हुई। 15 कंपनियों ने टेंडर डाक्यूमेंट खरीदा। उक्त कंपनी ने सुरक्षित निधि से पांच गुनी अधिक की बोली लगाई। ऐसे में गड़बड़ी या उपकृत करने की बात कहां उठती है? इसी तरह पुरी के होटल के लिए 25 अगस्त 2007 को टेंडर हुआ।

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