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वर्ष 2012 कसाब, गैंगरेप की शिकार छात्रा के नाम रहा

वर्ष 2012 कसाब, गैंगरेप की शिकार छात्रा के नाम रहा

आतंकवादी अजमल कसाब की फांसी और 23 साल की छात्रा के साथ बर्बर सामूहिक बलात्कार और 13 दिन जीवन और मौत से जूझने के बाद अंतत: उसकी मौत 2012 की ऐसी दो बड़ी घटनाएं रहीं, जिन पर पूरे देश में प्रतिक्रिया हुई। इसी साल देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए जिम्मेदार केन्द्रीय गृह मंत्रालय में मुखिया भी बदले। पी चिदंबरम की जगह सुशील कुमार शिन्दे ने गृह मंत्री का पदभार संभाला।

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा कसाब की दया याचिका खारिज किये जाने के बाद सरकार ने अत्यंत गोपनीय ढंग से लश्कर ए तय्यबा के आतंकी कसाब को पुणे की यरवादा जेल में फांसी दे दी। कसाब उन दस आतंकवादियों में से एक था, जिन्होंने 2008 में मुंबई पर हमला किया था। कसाब के बाकी साथी कमांडो कार्रवाई में मारे गये थे।

भारत की ओर से लगातार मांग किये जाने के बावजूद पाकिस्तान ने मुंबई आतंकी हमले की साजिश रचने वालों के खिलाफ अभी कोई कार्रवाई नहीं की है। ये सभी साजिशकर्ता पड़ोसी मुल्क में ही रहते हैं और उन पर एक अदालत में मुकदमा चल रहा है, जो संतोषजनक नहीं है। पाकिस्तान के गृह मंत्री रहमान मलिक इसी महीने नई दिल्ली आये, लेकिन उन्होंने यह कहते हुए भारत पर दोष मढ़ने का प्रयास किया कि उसकी सुरक्षा एजेंसियां 2008 के आतंकी हमले को रोकने में नाकाम रहीं।

जम्मू-कश्मीर इस वर्ष अपेक्षाकृत शांत रहा। असम को छोड़कर पूर्वोत्तर में भी हालात बेहतर रहे। माओवादियों की गतिविधियां सुरक्षा एजेंसियों के लिए सिरदर्द अवश्य बनी रहीं, हालांकि नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए केन्द्रीय अर्धसैनिक बलों के 80 हजार जवान तैनात किये गये हैं।

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