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कभी कमल को केशुभाई व मोदी ने मिलकर खिलाया था

कभी कमल को केशुभाई व मोदी ने मिलकर खिलाया था

लगातार तीसरी बार जीत का परचम लहराकर नरेंद्र मोदी ने बेशक गुजरात के सबसे कद्दावर नेता के रूप में खुद को स्थापित किया है, लेकिन एक दौर था जब केशुभाई पटेल और शंकर सिंह बाघेला के साथ मिलकर इस त्रिमूर्ति ने राज्य में भाजपा की नीव रखी थी और पार्टी संगठन को एक मजबूत आधार दिया था।
 
केशुभाई पटेल राज्य के गुजरात में भाजपा के प्रथम मुख्यमंत्री रहे हैं लेकिन अब वह इस पार्टी में नहीं है। कभी राज्य भाजपा की त्रिमूर्ति में से एक पटेल ने अब 84 साल की उम्र में अपनी नई पार्टी गुजरात परितर्वन पार्टी बना ली है। इस त्रिमूर्ति के दो अन्य नेताओं में मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी और शंकर सिंह वाघेला शामिल हैं। इन्ही तीन नेताओं ने गुजरात में भाजपा की नीव रखी थी।

कालेज के दिनों में मोदी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ [आरएसएस] के सक्रिय कार्यकर्ता थे। गुजरात में भाजपा की नींव डालने में मोदी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। शंकरसिंह बाघेला और केशुभाई पटेल के साथ-साथ मोदी ने भी राज्य में भाजपा को गांव-गांव तक पहुंचाया। वाघेला और मोदी एक दूसरे के पूरक माने जाते थे। वाघेला एक जननेता के रूप में जाने जाते थे, जबकि मोदी पर्दे के पीछे संगठन का काम करते थे। किन्तु पटेल की तरह वाघेला भी अब भाजपा में नहीं है।

पटेल को पार्टी ने 2001 में मुख्यमंत्री पद से हटाया था। वह आज मोदी के कट्टर विरोधी है। पिछले 10 वर्ष तक मौन रहे पटेल ने इस बार चुनाव से पूर्व अपना नया दल बनाकर 182 विधानसभा सीटों में से 175 में अपने प्रत्याशी खडे़ किए। वह राज्य की प्रभावशाली पटेल जाति के नेता है। पटेल ने स्वयं इस बार बिसाबदर विधानसभा सीट से चुनाव लडा़।

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