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बजट सत्र तक के लिए लटका लोकपाल विधेयक

बजट सत्र तक के लिए लटका लोकपाल विधेयक

बहुचर्चित लोकपाल विधेयक को संसद की मंजूरी मिलने में देर होगी, क्योंकि सरकार ने आज राज्यसभा में कहा कि वह प्रवर समिति की सिफारिशों के आलोक में जरूरी संशोधनों के साथ आगामी बजट सत्र में यह विधेयक उच्च सदन में लाएगी।
   
उच्च सदन में विपक्ष द्वारा लोकपाल विधेयक को शीतकाल सत्र में भी राज्यसभा में नहीं लाए जाने का भारी विरोध किए जाने के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री वी नारायणसामी ने यह जानकारी दी।
    
नारायणसामी ने कहा कि सरकार को प्रवर समिति की रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक संशोधन लाने के लिए मंत्रिमंडल को विश्वास में लेने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि आवश्यक प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद सरकार यह विधेयक बजट सत्र में लाएगी।
    
इसके पहले विपक्ष के नेता अरुण जेटली, माकपा के क़ेएऩ बालगोपाल और पी राजीव ने यह मुद्दा उठाया। जेटली ने कहा कि लोकपाल विधेयक राज्यसभा की प्रवर समिति को भेजा था न न कि स्थायी समिति को। प्रवर समिति की रिपोर्ट आ चुकी है और यह इस सदन की संपत्ति है। प्रवर समिति की रिपोर्ट पर चर्चा कराना सभापति का विशेषाधिकार है।
    
इस पर सरकार का रुख स्पष्ट करते हुए नारायणसामी ने कहा कि संसद सत्र शुरू होने के बाद प्रवर समिति की रिपोर्ट पेश की गयी है। इसे विचार के लिए कानून मंत्रालय के पास भेजा गया और उसने अपनी मंजूरी प्रदान कर दी। हम इस रिपोर्ट को कैबिनेट में ले जा रहे हैं ताकि संशोधनों को मंजूरी मिल सके।
    
यह विवादास्पद विधेयक लोकसभा ने पिछले साल ही पारित कर दिया था लेकिन राज्यसभा में इसके विभिन्न प्रावधानों पर विरोध के कारण यह अटक गया। विधेयक पर तीखे मतभेदों को देखते हुए इसे प्रवर समिति के पास भेज दिया गया था।
   
नारायणसामी को टोकते हुए जेटली ने कहा कि प्रवर समिति ने नियम 93 के तहत अपनी रिपोर्ट दी है और अब यह सदन की संपत्ति है। आप इस पर एकपक्षीय ढंग से काम करना शुरू कर सकते।
   
उन्होंने कहा कि आप इस रिपोर्ट को बदलने का अपना विशेषाधिकार नहीं मान सकते। यह रिपोर्ट यहां पेश हो चुकी है और इस पर संशोधनों के लिए चर्चा की जा सकती है। इससे पूर्व माकपा के बालगोपाल और पी राजीव ने इस बात को लेकर विरोध जताया कि सदन में इस रिपोर्ट पर चर्चा शुरू क्यों नहीं हो रही है।
    
उपसभापति पी जे कुरियन ने इन दोनों सदस्यों से कहा कि उन्हें यह मामला कार्यमंत्रणा समिति में उठाना चाहिए था। कार्यमंत्रणा समिति में न उठाकर इस मामले को यहां उठाना अनुशासनहीनता है।

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