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कम अंतर से हारने वालों पर दांव लगाएगी कांग्रेस

कम अंतर से हारने वालों पर दांव लगाएगी कांग्रेस

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में हार से सबक लेते हुए कांग्रेस पार्टी आगामी लोकसभा चुनाव के लिए राज्य में प्रत्याशियों के चयन में बहुत सतर्कता बरत रही है। कांग्रेस पहले उन नेताओं पर दांव लगाएगी, जो पिछले चुनाव में कम वोटों के अंतर से हारे थे।

इसी साल मार्च में विधानसभा चुनाव में करारी हार के लिए उम्मीदवारों के चयन में गलती को एक प्रमुख वजह स्वीकार करने वाले कांग्रेस नेतृत्व ने उत्तर प्रदेश में उम्मीदवारों के चयन के लिए दूसरे राज्यों के विधायकों को सभी आठ जोनों में बतौर पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। इन पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट के आधार पर उम्मीदवारों का फैसला किया जाएगा।

वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में अप्रत्याशित प्रदर्शन करते हुए 21 सीटों पर जीत दर्ज की थी। करीब 14 सीटों पर उसके उम्मीदवार दूसरे और करीब इतनी ही सीटों पर उसके उम्मीदवार बेहद कम अंतर से तीसरे स्थान पर रहे थे।

एक पर्यवेक्षक ने कहा कि हमें शीर्ष नेतृत्व ने पहले उन नेताओं के बारे जानकारी जुटाकर रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए हैं, जो पिछले लोकसभा चुनाव में कम वोटों के अंतर से हारे थे। हम ऐसे नेताओं के बारे में क्षेत्र की जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं से मिलकर प्रतिक्रिया ले रहे हैं।

कांग्रेस नेतृत्व को लगता है कि हारने के बाद लगातार अपने क्षेत्र में सक्रिय रहकर जनता के मुद्दों को उठाते रहने वाले नेताओं को क्षेत्रीय जनता पहले से जानती है और दूसरे दलों के मौजूदा सांसदों से जनता की नाराजगी का लाभ उनकी पार्टी के हारे उम्मीदवारों को मिल सकता है।

कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता वीरेंद्र मदान ने कहा कि शीर्ष नेतृत्व द्वारा नियुक्त पर्यवेक्षक अपने-अपने क्षेत्र में कम अंतर से पिछला चुनाव हारने वाले नेताओं के बारे में पार्टी कार्यकर्ताओं और आम लोगों से जानकारी जुटा रहे हैं। उनके बारे में अच्छी प्रतिक्रिया मिलने पर निश्चय ही उनकी दावेदारी सकारात्मक होगी।

पार्टी की दूसरी प्राथमिकता मौजूदा सांसदों के बारे में रिपोर्ट तैयार कराने की होगी। सर्वाधिक 80 संसदीय सीटों वाले उत्तर प्रदेश में पिछले लोकसभा चुनाव जैसा प्रदर्शन दोहराने के लिए कांग्रेस इस बार उन मौजूदा सांसदों का टिकट काटने में संकोच नहीं करेगी, जिनके रिपोर्ट कार्ड खराब होंगे।

प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुबोध श्रीवास्तव कहते हैं कि अपने क्षेत्र में केंद्रीय योजनाओं का ज्यादा से ज्यादा काम कराने वाले, क्षेत्र में महीने में कम से कम दो बार मौजूद रहने वाले, क्षेत्र के सभी महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में मौजूद रहने वाले पार्टी सांसदों की ही दावेदारी आगामी चुनाव में मजबूत होगी।

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