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आयोग ने मुख्य सचिव का प्रत्यावेदन ठुकराया

उत्तर प्रदेश राय सूचना आयोग ने मुख्य सचिव को निर्देश दिए हैं कि वह अपने दफ्तर मेंोन सूचना अधिकारी तैनात करंोोोनता द्वारा माँगी गई सूचनाओं काोवाब दे सके। आयोग ने यह कहते हुए मुख्य सचिव के प्रत्यावेदन को ठुकरा दिया है कि देश के 13 रायों के मुख्य सचिव कार्यालय मेंोनसूचना अधिकारी तैनात हैं। फिर यूपी इसका अपवाद क्यों हो?ड्ढr पिछले कई महीनों से मुख्य सचिव का दफ्तर अपने यहाँोनसूचना अधिकारी तैनात करने में आनाकानी कर रहा था। मुख्य सचिव का तर्क था हालाँकि मुख्य सचिव को कई अधिकार प्राप्त हैं लेकिन मुख्य सचिव के दफ्तर को कोई कार्य आवंटित न होने के कारण वह ‘लोक प्राधिकारी’ की श्रेणी में नहीं आता। मुख्य सचिव ने आयोग को दिए अपने प्रत्यावेदन में उस आदेश पर पुनर्विचार करने को कहा थाोिसमें उनके दफ्तर को ‘लोक प्राधिकारी’ माना गया था।ड्ढr कार्यवाहक मुख्य सूचना आयुक्त ज्ञानेन्द्र शर्मा ने मंगलवार को इस प्रत्यावेदन को ठुकराते हुए अपने फैसले में कहा किोनता इस उम्मीद से मुख्य सचिव कार्यालय से सूचना माँगती है कि वे सरकार के सबसे बड़े अधिकारी हैं इसलिए सूचनाोरूर मिलोाएगी। श्री शर्मा ने अपने फैसले में एक मामले का हवाला देते हुए कहा कि मुख्य सचिव कार्यालय पाँच महीने तक सूचना न देने बावाूद अन्य विभाग केोिम्मेदार अफसरों के खिलाफ न कोई कार्रवाई करता है न स्पष्टीकरण माँगता है। आयुक्त ने केन्द्रीय सूचना आयोग के एक फैसले काोिक्र करते हुए कहा कि ‘इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि प्राधिकारी किसी दायित्व का निर्वहन करता है या नहीं। यदि वह किसी खास संस्था के प्रमुख के रूप में काम नहीं करता या ऐसे किसी कमर या भवन में बैठता हैोहाँ लोग डेस्क पर काम करते हैं, तो भी वहोिम्मेदारी का औपचारिक पद धारण करता है।’ आयुक्त ने मुख्य सचिव को निर्देश दिए हैं कि वह पुराने आदेश को 15 दिन में लागू करोिसमेंोनसूचना अधिकारी व अपीलीय अधिकारी नामित कियाोाना है। इन नामों को सार्वानिक कियाोाए और सचिव केोरिए आदेश के अनुपालन की सूचना आयोग को दीोाए। आयोग ने मुख्य सचिव कार्यालय को 15 अक्टूबर तक का समय दिया है।

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