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ब्लॉग वार्ता : सानिया की शादी, टीवी वाले बाराती

सानिया मिर्जा शादी करने जा रही हैं। दूल्हा पाकिस्तान का क्रिकेट खिलाड़ी शोएब मलिक है। सानिया का व्यक्तिगत फैसला राष्ट्रीय मुद्दा बनाया जा रहा है। निकाह कितने प्रकार के होते हैं, कैसे होते हैं से लेकर भारत-पाकिस्तान के रिश्ते के तमाम पहलू सामने आ रहे हैं। जल्दी ही न्यूज चैनल वाले यह एलान करवा देंगे कि जब तक कसाब को फांसी नहीं होगी सानिया किसी पाकिस्तानी से शादी नहीं करेगी। ब्लॉगर बंधु तो उबल पड़े हैं कि सानिया की शादी पर इतना हंगामा क्यों मचा है। सब ऐसे चिन्तित हैं जैसे सानिया किसी हिन्दुस्तानी से शादी करती तो ये लोग उसके बारात की तैयारी में हाथ बंटाने हैदराबाद जाते।

http://aneelpandey.blogspot.com  क्लिक करते ही अनिल पाण्डेय गरम हुए पड़े हैं। गरिया रहे हैं कि न्यूज चैनलों ने इसे राष्ट्रीय मुद्दा क्यों बनाया। कहते हैं कि ऐसा लग रहा है कि इस शादी का असर दोनों देशों के रिश्तों पर पड़ने वाला है, जबकि ऐसा होना होता तो तभी हो जाता जब रीना राय ने मोहसिन खान से शादी की थी। तब फर्क नहीं पड़ा लेकिन अब हंगामा ऐसे मचा रहे हैं जैसे फर्क पड़ने वाला है।

इस बहस में कृष्ण मुरारी प्रसाद भी कूद पड़े हैं। उनके ब्लॉग का पता है-http://laddoospeaks.blogspot.com मुरारी जी की दलील है कि सानिया तुम जहां भी रहो खुश रहो। अपनी व्यथा को कविता में बदल दिया है। कुछ यूं लिखा है कि सानिया तुमने सगाई कर ली है, अब शादी भी कर ही लोगी, यह निर्णय भी तुम्हारा ही है, हम कौन होते हैं तुम्हें रोकने वाले, जब आज तक नहीं रुकी, नहीं झुकी, न डिगी, न घबरायी इन तंगदिल इंसानों से, अब क्या घबराना, बिल्कुल मत घबराना। बस महान कविता पर दाद की कमी कैसे रहती। सोनल रस्तोगी ने भी कमेंट में कविता लिख मारी है। शायद इतना कहना काफी है, पाकिस्तानी ले गया हिन्दुस्तान का हूर, मियां पंचायती कह रहे, खट्टे हैं अंगूर।

http://aidichoti.blogspot.com पर उपदेश सक्सेना भी दलीलें पेश कर रहे हैं। सबको बहाना मिल गया है कि न्यूज चैनल वाले क्यों दिखा रहे हैं। इनकी बातों से यही लगता है कि जो इन्हें अच्छा नहीं लगता उसी को बैठ कर देखते हैं। खैर, उपदेश जी लिख रहे हैं कि सानिया के बहाने जितने लोग आज भारत के प्रति प्रेम दर्शा रहे हैं, देशप्रेमी हुए जा रहे हैं, यदि यह एकता सामान्य परिस्थिति में दर्शाई जाए तो पाकिस्तान नापाक ना रहे।

सानिया को भारत की शांति दूत की संज्ञा दी जा रही है। उनके हैदराबाद स्थित घर के बाहर झाड़ियों में नामचीन न्यूज चैनलों के पत्रकार अपने कैमरों के साथ एक्सक्लुसिव फोटो लेने के लिए छिपे पड़े हैं। ऐड़ी-चोटी ब्लॉग के लेखक उपदेश सक्सेना भी मानते हैं कि सानिया की खबर आम लोगों से नहीं जुड़ी है। पत्रकार को नारद की भूमिका में होना चाहिए मगर उद्देश्य समाज सुधार का होना चाहिए। अब लाडो उस देस जाए या नहीं, यह फैसला तो कम से कम सानिया के परिवार को ही करनें दें। न्यूज चैनलों के अतिरेक की आलोचना में शोएब और आयशा का एंगल चटखारे लेने वाली न्यूज तो है ही लेकिन उसे किस मात्र में दिखायें ये कौन तय करेगा। आलोचक या संपादक।

सुधा सिंह ने प्रवक्ता डॉट कॉम पर लिखा है कि सफल और स्टार खिलाड़ी के पीछे लगकर मीडिया सानिया की छवि को अपने हक में भुनाता है। उन्हें इंसान से भगवान बनाने में मेहनत लगा देता है। उनके कपड़े, जूते, चड्ढी, बनियान सब महत्वपूर्ण हो जाते हैं। इस महागाथा के निर्माण के पीछे मीडिया जनमनोविज्ञान की बहती गंगा में हाथ तो धो ही रहा है साथ ही भविष्य का एजेंडा भी सेट कर रहा है। वह अपने लीन पीरियड के लिए मसाला जुटा रहा है। सुधा सिंह कहती हैं कि हिन्दुस्तानी मीडिया कब अपनी भाषा बोलेगा, अपना पैटर्न तय करेगा यह एक सवाल है। सुधा सिंह को पता होना चाहिए कि हिन्दुस्तानी मीडिया ने अपनी भाषा चुन ली है। पैटर्न भी चुन लिया है। पिछले सात साल से मीडिया के इस बर्ताव को लेकर आलोचना हो रही है। पता नहीं मीडिया में किस स्वर्ण युग का इंतजार हो रहा है।

http://mehtablogspotcom.blogspot.com क्लिक करते ही विकास मेहता का ब्लॉग जागो भारत खुलता है। भारत को जगाते हुए विकास मेहता न्यूज चैनलों को धन्यवाद दे रहे हैं कि जो भी हो वो इस खबर के हर पहलू को जन-जन तक पहुंचा रहे हैं। अभी से इतने राज खुल रहे हैं तो आगे क्या होगा। बात साफ है अगर आपके लिए यह फालतू स्टोरी है तो मत देखिये टीवी और नहीं है तो देखिये टीवी।

ravish@ndtv.com

लेखक का ब्लॉग है naisadak.blogspot.com

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