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एंटीमैटर

विज्ञान कथाओं और साइंस फिक्शन फिल्मों में अक्सर एंटीमैटर का नाम सुना जाता है, लेकिन यह केवल एक काल्पनिक तत्व नहीं, बल्कि असली तत्व है। इसकी खोज बीसवीं सदी के पूर्वाद्ध में हुई थी। तब से यह आज तक वैज्ञानिकों के लिए कौतुहल का विषय बना हुआ है।
जिस तरह सभी भौतिक वस्तुएं मैटर यानी पदार्थ से बनती हैं और स्वयं मैटर में प्रोटोन, इलैक्ट्रोन और न्यूट्रॉन होते हैं, उसी तरह एंटीमैटर में एंटीप्रोटोन, पोसिट्रॉन्स और एंटीन्यूट्रॉन होते हैं। एंटीमैटर इन सभी सूक्ष्म तत्वों को दिया गया एक नाम है। सभी पार्टिकल और एंटीपार्टिकल्स का आकार एक लेकिन चार्ज अलग होते हैं, जैसे कि एक इलैक्ट्रॉन नेगेटिव चार्ज होता है जबकि पॉजिट्रॉन पॉजीटिव चार्ज होता है। जब मैटर और एंटीमैटर एक दूसरे के संपर्क में आते हैं तो दोनों नष्ट हो जाते हैं। ब्रह्मांड की उत्पत्ति की थ्योरी महाविस्फोट (बिग बैंग) ऐसी ही टकराहट का नतीजा था।
पृथ्वी पर एंटीमैटर की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन वैज्ञानिकों ने प्रयोगशालाओं में बहुत थोड़ी मात्र में एंटीमैटर का निर्माण किया है। प्राकृतिक तौर पर एंटीमैटर पृथ्वी पर अंतरिक्ष तरंगों के पृथ्वी के वातावरण में आ घुसने पर अस्तित्व में आता है या फिर रेडियोएक्टिव मैटीरियल के ब्रेकडाउन से अस्तित्व में आता है। शीघ्र नष्ट हो जाने के कारण यह पृथ्वी पर अस्तित्व में नहीं आता, लेकिन बाह्य अंतरिक्ष में यह बड़ी मात्र में उपलब्ध है जिसे बेहद आधुनिक यंत्रों के सहारे देखा जाता है। एंटीमैटर नवीकृत ईंधन के तौर पर भी बेहद उपयोगी होता है। लेकिन इसे बनाने की प्रक्रिया इसके ईंधन के तौर पर अंतत: होने वाले इस्तेमाल से कहीं अधिक महंगी बैठती है। इसके अलावा मेडिकल साइंस में भी यह कैंसर का पेट स्कैन (पोजिस्ट्रान एमिशन टोमोग्राफी) के जरिए पता लगाने में भी इसका इस्तेमाल होता है। साथ ही कई रेडिएशन तकनीकों में भी इसका इस्तेमाल होता है।

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  • Web Title:एंटीमैटर