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छठी शताब्दी का विशाल शिव मंदिर

कांचीपुरम स्थित शिव का एकंबरनाथ मंदिर  स्थापत्य कला की दृष्टि से सबसे अद्भुत मंदिर है। यह कांचीपुरम के मंदिरों में सबसे विशाल है। यह 40 एकड़ में फैला हुआ है। इसे पल्लवों ने सातवीं शताब्दी में बनवाया था। बाद में इसका पुनरुद्धार चोल और विजयनगर के राजाओं ने भी कराया। 11 मंजिलों का यह मंदिर दक्षिण भारत के सबसे ऊंचे मंदिरों में से एक है। मंदिर में बहुत आकर्षक मूर्तियां हैं। मंदिर में प्रवेश करने के साथ ही इसका विशाल गोपुरम श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। विजयनगर के राजा कृष्णदेवराय द्वारा बनवाया गया यह गोपुरम या मुख्य प्रवेश द्वार 59 मीटर ऊंचा है। जब आप मंदिर के मुख्य चौबारे में प्रवेश करते हैं तो विशाल गलियारा आपका स्वागत करता है। मंदिर में ऐसे पांच बड़े गलियारे हैं।

बालू का शिवलिंगम
मंदिर के मुख्य मंडप में शिव विराजमान हैं। यहां पार्वती का कोई मंदिर नहीं हैं, क्योंकि शहर का कामाक्षी मंदिर उनका प्रतिनिधित्व करता है। मंदिर का शिवलिंग बालू का बना हुआ माना जाता है। यह ढाई फीट लंबा है। इसका जलाभिषेक नहीं, तैलाभिषेक करके पूजन किया जाता है। श्रद्धालुओं को शिवलिंगम तक जाने की अनुमति नहीं है। मंदिर में भगवान विष्णु की भी एक छोटी प्रतिमा है, जिन्हें यहां वामन मूर्ति कहा जाता है।

पुराना आम्र वृक्ष
मंदिर परिसर में एक आम का वृक्ष है। इसे 3,500 साल पुराना बताया जाता है। कहा जाता है कि इसी वृक्ष के नीचे पार्वती ने शिव को पाने के लिए कठोर तप किया था। शिव प्रसन्न होने के बाद आम्र वृक्ष में प्रकट हुए, इसलिए उनका नाम एकंबरेश्वर पड़ा। यानी आम वृक्ष के देवता। इसके तने को काट कर मंदिर में धरोहर के रूप में रखा गया है। इस छठी शताब्दी के इस मंदिर को पंचभूत स्थलम के पांच पवित्र शिव मंदिरों में से एक का दर्जा प्राप्त है और यह धरती तत्व का प्रतिनिधित्व करता है।

एक हजार स्तंभ
मंदिर का एक मुख्य आकर्षण अविराम काल मंडपम है, जिसमें एक हजार स्तंभ हैं।  मंदिर के भीतरी प्रांगण की दीवारों के साथ-साथ 1008 शिवलिंगम भी स्थापित किए गए हैं। मंदिर परिसर में एक सुंदर सरोवर भी है। इस सरोवर के बीच में गणेश जी की एक प्रतिमा है।

खुलने का समय
मंदिर सुबह 6 बजे से दोपहर 12.30 तक और शाम को 4 बजे से रात्रि 8.30 बजे तक खुलता है। मार्च-अप्रैल में मनाया जाने वाला फाल्गुनी उथीरम इस मंदिर का बड़ा त्योहार होता है।
कैसे पहुंचें: कांचीपुरम तमिलनाडु के अन्य शहरों से सड़क और रेलमार्ग दोनों से जुड़ा हुआ है। चेन्नई से इसकी दूरी करीब 70 किलोमीटर है। कांचीपुरम का सबसे नजदीकी एयरपोर्ट चेन्नई है।

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  • Web Title:shiva temple of the sixth century