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इनसे सीखें : दृष्टिबाधित होने के बावजूद दूसरों के लिए बने प्रेरणास्रोत

इनसे सीखें : दृष्टिबाधित होने के बावजूद दूसरों के लिए बने प्रेरणास्रोत

जमशेदपुर का सरस्वती म्यूजिकल बैंड साहस और संघर्ष का जीता-जागता उदाहरण है। इसके सभी कलाकार दिव्यांग (दृष्टिबाधित) हैं। इन्होंने किसी के कंधे को पकड़कर आगे बढ़ने के बजाय खुद के लिए रास्ता बनाया है। 

कुछ कर गुजरने की चाहत में पांच दिव्यांगों ने 24 जनवरी 2015 को अपना एक म्यूजिकल ग्रुप बनाया था। इनमें सूर्यकांत शर्मा, रविचंद्र झा, सौरभ घोष, प्रीतपाल सिंह और प्रणिता मजूमदार शामिल हैं। दिव्यांग होने के बावजूद इनकी सुरीली धुन और आवाज ने ऐसा जादू बिखेरा है कि जल्द ही ये जमशेदपुर समेत कई राज्यों में मशहूर हो गए। यह टीम आयोजनों में दो से आठ घंटे तक का प्रोग्राम देती है। ग्रुप में एकल गायक, ड्रमर और कीबोर्ड प्लेयर शामिल हैं। 

नेत्रहीनता पर अफसोस नहीं : बैंड के संयोजक सूर्यकांत बताते हैं कि वे बड़े होकर गायक बनना चाहते थे। इसलिए अपनी नेत्रहीनता को उन्होंने अपने रास्ते की अड़चन नहीं बनने दी। 12 वर्ष की उम्र से ही कई गुरुओं से संगीत सीखा। उनकी टीम जमशेदपुर समेत कोलकाता, चाईबासा, बरौनी जैसे शहरों में अपना कार्यक्रम दे चुकी है। 

आय के लिए शुरू किया था बैंड : सूर्यकांत बताते हैं कि वे कहीं नौकरी करना चाहते थे। जब तक नौकरी न मिले तब तक आय के स्रोत के लिए उन्होंने अपना बैंड शुरू किया। इसमें इनकी मदद दोस्त रविचंद्र ने की। दोनों ने दिव्यांग होने के बावजूद झारखंड आइडल समेत कई राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धाओं में भाग लिया। हर जगह इनकी प्रतिभा की सराहना हो रही है।

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