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परंपरा से आगे

द काठमांडू पोस्ट, नेपाल

देश की विकास योजनाओं और नीतियों को निर्धारित करने वाली संस्था ‘राष्ट्रीय योजना आयोग’ (एनपीसी) इन दिनों 14वीं त्रिवर्षीय योजना को अंतिम रूप देने में जुटा हुआ है। यह योजना देश के सभी विकास कार्यक्रमों की अगले तीन वर्षों की रूपरेखा तय करेगी। नेपाल में योजनाबद्ध आर्थिक विकास की शुरुआत 1956 में हुई, जब पहली पंचवर्षीय योजना लागू की गई थी। उसके बाद से सरकार ने आठ पंचवर्षीय योजनाओं को लागू किया और चार त्रिवर्षीय योजनाओं को। इन त्रिवर्षीय योजनाओं से, जो कि वित्तीय वर्ष 2007-08 से लागू हुईं, यह संकेत मिला है कि सरकार का झुकाव अल्पकालिक योजनाओं की तरफ बढ़ा है, जो अमूमन अपनी प्रकृति से तदर्थ योजनाएं हैं। इस रुझान को रोकने के लिए तत्कालीन एनपीसी उपाध्यक्ष गोविंद राज पोखरेल ने यह तय किया था कि पंचवर्षीय या सप्तवर्षीय योजनाएं बनाई जाएंगी। पोखरेल की टीम का मानना था कि एक दीर्घकालिक योजना साल 2022 तक विकासशील देशों में नेपाल को शामिल कराने के सरकारी लक्ष्य में मददगार साबित होगी। लेकिन इससे पहले की टीम की यह योजना असली रूप ले पाती, सरकार बदल गई और योजना आयोग के सदस्यों ने सामूहिक रूप से इस्तीफा दे दिया। सत्ता में आई ओली सरकार ने नए उपाध्यक्ष के तौर पर युबराज खटिवदा को नियुक्त किया। युबराज ने पुरानी टीम के प्रस्ताव को खारिज कर दिया और त्रिवर्षीय योजना को ही जारी रखने का फैसला किया। हालांकि युबराज नई त्रिवर्षीय योजना को अंतिम रूप दे पाते, इसके पहले उन्हें भी पद छोड़ना पड़ा। योजना आयोग के नए उपाध्यक्ष मिन बहादुर श्रेष्ठ जल्दी ही 14वीं योजना को अंतिम रूप दे देंगे। सरकार ने साल 2022 तक नेपाल को विकासशील देशों की कतार में शामिल करने और 2030 तक मध्य-आयवर्ग वाले देश में बदलने का लक्ष्य रखा है। ये महत्वाकांक्षी लक्ष्य हैं, और ये तब तक हासिल नहीं किए जा सकते, जब तक कि सुशासन सुनिश्चित नहीं हो पाता। इसलिए सरकार को अल्पकालिक योजनाओं की परंपरा त्याग दीर्घकालिक योजनाओं की तरफ बढ़ना चाहिए, जो वाकई देश का भविष्य बदल सकते हैं।

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  • Web Title: beyond tradition
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