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'टाटा' से रिटायर हुए रतन, साइरस ने संभाली कमान

मुंबई, एजेंसी First Published:28-12-2012 09:37:46 AMLast Updated:28-12-2012 08:27:11 PM
'टाटा' से रिटायर हुए रतन, साइरस ने संभाली कमान

देश के सबसे पुराने टाटा उद्योग समूह की पहचान बन चुके रतन टाटा, 50 साल की सेवा के बाद शुक्रवार को इसके चेयरमैन पद से सेवानिवृत्त हो गये। आखिरी दिन वह दफ्तर से दूर रहे।

टाटा समूह के मुख्यालय बांबे हाउस के सूत्रों के मुताबिक आज 75 साल के हुए टाटा अपने जन्मदिन के अवसर पर पुणे में हैं। अभी यह साफ नहीं है कि वह आज कार्यालय जायेंगे अथवा नहीं।

टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के सूत्रों ने कहा कि टाटा समूह के नये चेयरमैन साइरस मिस्त्री ने आज बांबे हाउस का दौरा किया और कल वह नई जिम्मेदारी संभालेंगे। मिस्त्री पिछले एक साल से टाटा उद्योग समूह की कमान हाथ में लेने की तैयारी कर रहे हैं। टाटा समूह का कारोबार इस समय नमक से लेकर सॉफ्टवेयर, इस्पात, बिजली और आटोमोबाइल क्षेत्र में फैला हुआ है।

मिस्त्री समूह की कंपनी टाटा मोटर्स की प्रवेश स्तरीय सीडान इंडिगो मांजा से आज दफ्तर गए। समूह ने इससे पहले घोषणा कर दी थी कि मिस्त्री कल से चेयरमैन का पद संभालेंगे। दक्षिण मुंबई के पुराने भवनों में से एक बांबे हाउस की ओर जाने वाली संकरी सड़क पर आज सुबह से मीडियाकर्मियों की भीड़ लगी रही।

जेआरडी टाटा द्वारा 1991 में उत्तराधिकारी चुने जाने के बाद रतन टाटा 21 साल तक समूह के अध्यक्ष बने रहे। इस दौरान दुनियाभर में विभिन्न क्षेत्रों में अधिग्रहण समेत समूह के बड़े फैसले लेने का श्रेय उन्हें जाता है। मिस्त्री शापूरजी पलोंजी परिवार से हैं और 2006 से ही उन्होंने इस समूह में विभिन्न पदों पर काम किया है। शापूरजी पलोंजी समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस में सबसे बड़ी निजी शेयरधारक है।

चार जुलाई, 1968 को जन्मे साइरस मिस्त्री ने लंदन के इंपीरियल कॉलेज ऑफ साइंस टेक्नोलाजी एंड मेडिसिन से सिविल इंजीनियरिंग में स्नातक किया और लंदन बिजनेस स्कूल से प्रबंधन में स्नात्कोत्तर किया। पिछले साल पांच सदस्यों वाली समिति ने उन्हें टाटा समूह का नेतृत्व करने के लिये रतन टाटा का उत्तराधिकारी चुना।

रतन टाटा के कार्यकाल के दौरान समूह की आय जो कि 1991 में मात्र 10,000 करोड़ रुपये थी वर्ष 2011-12 आते आते कई गुना बढ़कर 100.09 अरब डॉलर (करीब 4,75,721 करोड़ रुपए) हो गई। टाटा ने समूह का चेयरमैन रहते हुये अपनी लंबी पारी में देश से बाहर कई अधिग्रहण किये। वर्ष 2000 में समूह की टाटा टी के जरिये टेटली का 45 करोड़ डॉलर में अधिग्रहण किया गया। वर्ष 2007 में टाटा स्टील ने कोरस समूह का अधिग्रहण किया।

यह सौदा 6.2 अरब डॉलर में हुआ। इसके बाद वर्ष 2008 में जेगुआर लैंडरोवर का 2.3 अरब डॉलर में अधिग्रहण किया गया। टाटा ने केवल बड़े-बड़े अधिग्रहण तक ही अपने को सीमित नहीं रखा, बल्कि देश में उन्होंने आम आदमी की जरूरतों पर भी ध्यान दिया और एक लाख रुपये में नैनो कार बाजार में उतारी।

लखटकिया कार से प्रचलित अपनी इस योजना के लिये उन्हें पश्चिम बंगाल में विरोध का सामना भी करना पड़ा। उन्हें अपनी यह परियोजना पश्चिम बंगाल से हटाकर गुजरात में साणंद ले जानी पड़ी। हालांकि, आम आदमी की यह कार समूह की उम्मीदों पर पूरी तरह खरी नहीं उतर पाई। फिर भी इसे टाटा की तरफ से एक आम मध्यमवर्गीय परिवार के लिये सफर के सुरक्षित विकल्प के तौर पर याद किया जायेगा।

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