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टाटा की तोप ने हथियार बाजार में मचाई खलबली

नई दिल्ली, एजेंसी First Published:10-12-2012 10:41:37 AMLast Updated:10-12-2012 11:11:09 AM
टाटा की तोप ने हथियार बाजार में मचाई खलबली

टाटा समूह ने देश में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के हथियार बाजार में खलबली मचाने वाले एक घटनाक्रम में 155 एमएम की 52 कैलीबर वाली तोप बनाकर पेश कर दी है।

बोफोर्स तोपों से अधिक क्षमता रखने वाली यह तोप देश के निजी क्षेत्र की ओर से रक्षा बाजार में एक मजबूत दावेदारी के रूप में सामने आई है। निजी क्षेत्र की इस कंपनी ने यह तोप ऐसे समय बनाई है जब उसके लिए सरकार की ओर से कोई प्रस्ताव नहीं आया था।

भारतीय सेना ने आखिरी तोपों के रूप में 1986 में बोफोर्स तोपें खरीदी थीं जिनकी रेंज 30 किलोमीटर थी। ये तोपें 155 एमएम की 39 कैलीबर की थीं जबकि टाटा पावर एसईडी ने 52 किलोमीटर रेंज की तोप बनाई है।

बोफोर्स तोपों से जुडे़ विवाद के कारण सेना को पिछले ढ़ाई दशक से अधिक समय से कोई नई तोप नहीं मिल पाई है। निजी क्षेत्र में ही तोपों के विकास से सरकार का भय काफी हद तक दूर होने की उम्मीद है।

इस बीच सार्वजनिक उपक्रम में भी आयुध फैक्ट्री बोर्ड देसी बोफोर्स बना चुका है और अब सरकार के सामने सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बीच चुनने के अवसर मिल जाएंगे। तोपखाने को दुरुस्त करने के लिए भारतीय सेना को आने वाले समय में करीब आठ अरब डॉलर की विभिन्न प्रकार की तोपें खरीदनी हैं।

टाटा के सूत्रों के अनुसार उनकी तोप करीब 55 प्रतिशत स्वदेशी उपकरणों से बनी है जबकि उसकी नली और प्रमुख धातु का आयात किया गया है। टाटा ने बेहद अचानक ढंग से यह तोप पेशकर हथियार बाजार को चौंका दिया है।

टाटा अधिकारियों के अनुसार पिनाका रॉकेट लान्चर, एल70 गन अपग्रेडेड, रूस के टी90 टैंकों के लिए फायर कंट्रोल सिस्टम आदि परियोजनाओं में हिस्सा लेने का उन्हे फायदा लगा और तोप की हाइड्रोलिक्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और फायर कंट्रोल प्रणाली देश में ही बनाई गई है।

टाटा ने इस तोप के विकास के लिए कुछ टेक्नोलॉजी अफ्रीका और पूर्वी यूरोप से खरीदी हैं। टाटा की कोशिश अब अपनी तोप को स्वदेशी फायरिंग रेंज में आजमाने की है और कंपनी की ओर से रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के साथ गठबंधन कायम करने का भी प्रयास किया जा रहा है।

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