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सूचना प्रौद्योगिकी कानून पर महान्यायवादी को सम्मन

सर्वोच्च न्यायालय ने गुरुवार को महान्यायवादी जी.ई. वाहनवती को शुक्रवार को एक जनहित याचिका पर सरकार का पक्ष रखने के लिए कहा। याचिका में सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) कानून 2000 से इसकी धारा 66ए को हटाने की मांग की गई है।

मुख्य न्यायाधीश अल्तमस कबीर और न्यायमूर्ति जे. चेलामेश्वर की पीठ से वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि आईटी कानून की धारा 66ए संविधान के अनुच्छेद 4,19(1)(ए) और अनुच्छेद 21 के विरुद्ध है। इस पर पीठ ने वाहनवती को अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया।

इस धारा में वेबसाइटों या अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों पर अप्रिय टिप्पणी लिखने वालों पर कार्रवाई किए जाने का प्रावधान है।

याचिका एक विद्यार्थी श्रेया सिंघल ने दाखिल की।

अदालत ने कहा, ''जिस प्रकार का घटनाक्रम सामने आया, उससे इस पर विचार किए जाने की जरूरत है, ताकि भविष्य में यह दोबारा नहीं हो।''

अप्रैल में जाधवपुर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अम्बिकेश महापात्रा को कोलकाता में गिरफ्तार कर लिया गया। उन पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का कार्टून प्रसारित करने का आरोप था।

उधर बाल ठाकरे के निधन के बाद मुम्बई बंद पर सवाल उठाने वाली टिप्पणी फेसबुक पर डालने पर महाराष्ट्र में एक युवती शहीन ढाडा और उनके एक मित्र को गिरफ्तार कर लिया गया।

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  • Web Title:सूचना प्रौद्योगिकी कानून पर महान्यायवादी को सम्मन