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फिल्म रिव्यू: आशिकी 2

विशाल ठाकुर First Published:26-04-2013 07:30:52 PMLast Updated:27-04-2013 11:03:19 AM
फिल्म रिव्यू: आशिकी 2

यह बात अब साफ हो चुकी है कि भट्ट कैंप की फिल्मों के सीक्वल का उनकी पिछली फिल्म की कहानी या किरदारों से कुछ लेना-देना नहीं होता। भट्ट कैंप केवल अपनी हिट फिल्मों के टाइटल कैश करने के लिए फिल्मों के सीक्वल बनाता है और इसमें कोई दो राय नहीं कि मुनाफा भी कमाते हैं। भट्ट कैंप की नई फिल्म ‘आशिकी 2’ इस लीग में अगली कड़ी है, जो 1990  में रिलीज हुई महेश भट्ट निर्देशित फिल्म ‘आशिकी’ का भाग 2 है। फिल्मों के सीक्वल्स के अगर तकनीकी पहलू पर अगर गौर करें तो ‘आशिकी 2’ का ‘आशिकी’ से कुछ लेना-देना नहीं है। न कहानी का न किरदारों का, सिवाय इसके कि ‘आशिकी’ की तरह ‘आशिकी 2’ का मुख्य किरदार राहुल भी संगीत प्रेमी है और एक लड़की से प्यार करता है। समानता इस बात को लेकर भी है कि इन दोनों ही फिल्मों की पृष्ठभूमि में संगीत है। इसलिए महेश भट्ट चाहते तो इस फिल्म का नाम बदल भी सकते थे, पर इससे उन्हें ‘लाभ’ नहीं होता।

‘आशिकी 2’ की कहानी में राहुल जयकर (आदित्य रॉय कपूर) एक गायक है, जिसकी ख्याति किसी रॉकस्टार सरीखी है। रॉकस्टार है तो आदतें भी वैसी ही हैं। नशे में चूर रहना, बेफिक्री, शो छोड़कर भाग जाना वगैरह वगैरह। एकदिन राहुल की नजर आरोही (श्रद्धा कपूर) पर पड़ती है, जो गोवा के एक बार में राहुल के ही हिट गीत गा गाकर अपनी गुजर-बसर करती है। राहुल को आरोही की आवाज व अंदाज पसंद आता है। वह ठान लेता है कि आरोही को नंबर 1 सिंगर बनाकर रहेगा। हालांकि खुद उसकी प्रसिद्धि खत्म हो रही है। आयोजकों के साथ उसके बुरे बर्ताव की वजह से उसके पास शोज की कमी होती जा रही है। मुंबई आकर राहुल, आरोही को एक बड़ी म्यूजिक कंपनी के मालिक (महेश ठाकुर) से मिलवाता है। उसे आरोही की आवाज पसंद आ जाती हैऔर देखते ही देखते आरोही का पहला एलबम भी  रिलीज हो जाता है।

यही नहीं उसे गायकी के बेस्ट अवार्डस भी मिलने लगते हैं, लेकिन तभी राहुल को अहसास होता है कि वह आरोही की तरक्की में बाधक तो नहीं बन रहा। वह आरोही से दूर जाने लगता है। ये दूरी उसे शराब को और करीब ले जाती है। आरोही से ये देखा नहीं जाता। वह अपना संगीत करियर छोड़ राहुल को पाना चाहती है। और एक दिन वो होता है, जिसके बारे में किसी ने नहीं सोचा होता। ‘आशिकी 2’ कई फिल्मों का चरबा नजर आती है। इसके कई हिस्सों में कभी ‘अभिमान’ की झलक दिखती है तो कभी ‘देवदास’ व ‘रॉकस्टार’ की। कभी लगता है कि ‘आशिकी 2’ का राहुल ‘गुजारिश’ के रितिक की तरह बेबस हो गया है तो कभी लगता है कि ये ‘आशिकी’ का वो पुराना राहुल है, जो सब अपने दिल में रखता है और दिल जला बैठता है।

जैसा कि मैंने शुरू में कहा कि ‘आशिकी 2’ का ‘आशिकी’ से कुछ लेना-देना नहीं है। बावजूद इसके बार-बार ध्यान पुरानी ‘आशिकी’ की तरफ जाता है। इस फिल्म के एक सीन में तो राहुल अपने दोस्त राजीव से कहता भी है कि ‘चल यार आरोही को ढूंढ़ते हैं, पता नहीं वो कहां मिलेगी..’ ‘आशिकी’ में भी राहुल (राहुल रॉय) और उसका दोस्त (दीपक तिजोरी) अनु (अनु अग्रवाल) को मुंबई की संकरी गलियों में गाना (जानम जाने जां..) गाकर ढूंढ़ते  हैं। लेकिन ‘आशिकी 2’ में इस सीन को उस संवाद के बाद ही काट दिया गया है।

दरअसल, मोहित सूरी ने  ‘आशिकी 2’  को कई जगह महेश भट्ट की ‘आशिकी’ के करीब ले जाने की कोशिश की है, पर एक कमजोर कहानी के आगे वे भी बेबस नजर आये हैं। फिल्म केवल दो किरदारों के आस-पास ही मंडराती है। फिल्म में किरदार कई बार अपनी बातों के विरोधाभास में फंसते नजर आते हैं। राहुल एक तरफ तो आरोही को टॉप की सिंगर बनाने की बात करता है और दूसरी तरफ जब अंत में अपनी जिंदगी के दोराहे पर खड़ा होता है तो उसका फैसला चौंकाने वाला होता है।

एक अन्य बात ये भी कि राहुल के किरदार पर संगीत से ज्यादा शराब सवार दिखाई गयी है, जो उसे एक नशेड़ी के रूप में पेश करती है। ऐसे में उसकी अच्छाई या एक प्रेमी के रूप में आरोही के समक्ष पहचान धूमिल पड़ती दिखती है। मोहित सूरी राहुल की जिंदगी को एक रॉकस्टार के प्रभाव से बचा नहीं पाए और न ही वह राहुल को एक प्रेमी के रूप में पेश कर सके।

राहुल का किरदार अधपकी डिश की तरह रह गया है। हालांकि आदित्य रॉय कपूर ने फिल्म में कई जगह अच्छा अभिनय किया है और श्रद्धा कपूर ने भी उनका अच्छा साथ दिया है। दोनों की स्क्रीन कैमिस्ट्री भी कई जगह अच्छी है, पर ये प्रेमी जोड़ा एक ऐसी आशिकी पेश नहीं कर पाए, जिसे देख लव बर्ड्स फिल्मी स्टाइल में कसमें-वादे करते हैं। कमजोर संगीत होने के बावजूद फिल्म में ‘तुम ही हो..’ और  ‘सुन रहा है तू रो रहा हूं मैं..’ गीत अच्छे बन पड़े हैं। बावजूद इसके काफी कोशिशों के बाद भी ‘आशिकी 2’ उम्मीदों पर खरी नहीं उतरती। यह एक साधारण फिल्म से आगे ही नहीं बढ़ पायी है।

सितारे: आदित्य रॉय कपूर, श्रद्धा कपूर, शाद रंधावा, महेश ठाकुर
निर्देशक: मोहित सूरी
संगीत: जीत गांगुली, मिथुन, अंकित तिवारी

 

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