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खुद से सलाह

नीरज कुमार तिवारी First Published:08-01-2013 06:56:09 PMLast Updated:00-00-0000 12:00:00 AM

आप जब परेशानी से घिरे होते हैं, तब क्या सोचते हैं? ज्यादातर लोग चाहते हैं कि उन्हें हमदर्दी हासिल हो। कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जिन्हें दूसरों के सलाह की जरूरत होती है। लेकिन कितने हैं, जो आत्म-सुझाव में परेशानी का हल तलाशते हैं? ऑपेरा स्टार रिसे स्टीवन्स ने बताया कि शुरुआती दिनों में उन्हें हार ही हार हासिल हो रही थी। तब उसके दिमाग में केवल एक बात नाचती कि वह इसलिए विफल हो रही है कि उसकी आवाज के सच्चे कद्रदान नहीं हैं, उनका कोई गॉड फादर नहीं है। एक दिन उसे एक आत्म-सुझाव मिला कि जितना वक्त वह इस तरह सोचने में व्यतीत करती है, उतना अपने रियाज को और दे तब? तब वही हुआ, जो होना था। वह कामयाब हुई। उनके कद्रदान दिन-ब-दिन बढ़ते चले गए। स्टीवन्स कहती हैं कि कामयाबी का सबसे बड़ा रास्ता तब खुलता है, जब आप अपनी कमियों के साथ सहज होते हैं, उसे स्वीकार करते हैं, अपनी आलोचना करते हैं और आलोचक ‘स्व’ को महत्व देते हैं। इस मसले पर डॉक्टर जोसेफ मर्फी कहते हैं कि सेल्फ सजेशन का मतलब है, खुद को किसी खास बात का सुझाव देना।

वह कहते हैं कि हर साधन की तरह इसके भी गलत प्रयोग से नुकसान हो सकता है, लेकिन सही तरीके से प्रयोग करने पर यह बहुत उपयोगी बन जाता है। दरअसल, विचारों में चुंबकीय ताकत होती है और किसी भी व्यक्ति को सबसे ज्यादा उसके अपने विचार प्रभावित करते हैं। अगर आप दिल से मान बैठे हैं कि आप हार चुके हैं, तो दुनिया की कोई ताकत आपको जिता नहीं सकती, लेकिन अगर दिल कहता है कि आप विजेता बन सकते हैं, तो आप जीत की राह तलाश ही लेंगे। समस्या यह है कि हम खुद की बात ही नहीं सुनना चाहते। इसके लिए आपको ठहरना पड़ता है। शांत होना पड़ता है। तभी आपका दिल गलतियों, कमजोरियों को सामने लाकर रखता है। बस हममें अपना रचनात्मक आलोचक बनने का साहस होना चाहिए।  

 
 
 
 
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