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मेरी दोस्त चाहती थी दरिंदों को जिंदा जला दिया जाए

नई दिल्ली, हिन्दुस्तान टीम First Published:04-01-2013 11:58:32 PMLast Updated:00-00-0000 12:00:00 AM

चलती बस में गैंगरेप कांड की शिकार बनी छात्रा का दोस्त शुक्रवार शाम पहली बार लोगों के सामने आया। उसने एक न्यूज चैनल से बातचीत में कहा, ‘वह जिंदा रहना चाहती थी।
वह चाहती थी कि उसके साथ दुष्कर्म करने वाले सभी आरोपियों को फांसी के बजाए जला कर मारा जाए।’ बातचीत के दौरान उसने घटनाक्रम पर पुलिस-अस्पताल व समाज के रवैये को लेकर भी कई सवाल उठाए। युवक ने कहा कि बस से फेंकेने के बाद दरिंदों ने लड़की
को बस से कुचलने की भी कोशिश की, लेकिन मैंने उसे बचा लिया। हम ढाई घंटे तक सड़क पर ही पड़े रहे। इस दौरान तीन पीसीआर वैन तो आईं लेकिन सभी सीमा विवाद में उलझी रहीं।

हम राहगीरों से मदद मांग रहे थे, लेकिन किसी ने हमें शरीर ढकने के लिए कपड़ा तक नहीं दिया। शायद उन्हें डर था कि वे रुकेंगे तो पुलिस के चक्कर में फंस जाएंगे। अस्पताल पहुंचने पर भी ठीक से मदद नहीं मिली। वहां भी किसी ने तन ढकना जरूरी नहीं समझा।

युवक के अनुसार, वह वारदात की रात से ही स्ट्रेचर पर था। 16 से 20 दिसंबर तक वह थाने में ही रहा। इस दौरान पुलिस ने उसका उपचार भी नहीं करवाया। इस चश्मदीद का कहना है कि अगर लड़की को उपचार के लिए विदेश ले ही जाना था तो यह फैसला पहले होना चाहिए था।

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