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बवाना संघर्ष समिति ने की विस्थापितों को प्लाट की मांग

नई दिल्ली, एजेंसी First Published:02-01-2013 05:00:23 PMLast Updated:00-00-0000 12:00:00 AM

दिल्ली में राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान शहर के सुन्दरीकरण के कारण बेघर बार करके बवाना साबदा और घेवरा जैसी जगहों पर नए मकान देने के भरोसे के साथ भेजे गए करीब छह सौ परिवारों ने उपराज्यपाल तेजेन्द्र खन्ना से फिर गुहार लगाई है कि उन्हें दिल्ली विकास प्राधिकरण से वैकल्पिक भूखंड दिलाए जाएं और प्राधिकरण के भ्रष्ट अधिकारियों को दंडित किया जाए।

बवाना संघर्ष समिति ने बुधवार को एक विज्ञप्ति में आरोप लगाया कि डीडीए विस्थापित परिवारों के पास वैध दस्तावेज होने और उपराज्यपाल द्वारा गत वर्ष सात मार्च के आदेश के बावजूद उन परिवारों को भूखंड देने में आनाकानी कर रहा है। समिति ने डीडीए के भ्रष्ट अधिकारियों को दंडित किए जाने की भी मांग की है।

समिति ने बताया कि राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान शहर के सुन्दरीकरण की योजना के तहत हजारों परिवारों को शहर के बाहरी क्षेत्रों में विस्थापित कर दिया गया था और वादा किया गया था कि उन्हें पुनर्वासित किया जाएगा लेकिन हजारों में से सिर्फ चंद परिवारों को ही साबदा घेवरा जैसी जगहों पर बसाया गया जबकि कई परिवारों को मनमनाने ढंग से अयोग्य घोषित किया गया।

समिति के अनुसार लगभग छह सौ परिवारों के पास वैकल्पिक भूखंड प्राप्त करने के लिए वैध दस्तावेज है। उपराज्यपाल ने सात मार्च को एक आदेश जारी करके उन सब परिवारों को प्लाट दिए जाने का डीडीए को निर्देश दिया था लेकिन डीडीए अब तक टाल मटोल पर कायम है। समिति ने आरोप लगाया कि डीडीए ने कई बार दस्तावेजों की जांच कराई। प्लाट आवंटन योग्य लोगों से रिश्वत मांगी गई और अयोग्य लोगों से रिश्वत लेकर प्लाट योग्य बनाया गया है। दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने भी इसकी तस्दीक की है। समिति ने उपराज्यपाल से इस विषय पर पुन: ध्यान देने की मांग की है।

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