Image Loading
रविवार, 25 सितम्बर, 2016 | 14:20 | IST
Mobile Offers Flipkart Mobiles Snapdeal Mobiles Amazon Mobiles Shopclues Mobiles
खोजें
ब्रेकिंग
  • KANPUR TEST: भारत की पारी घोषित, न्यूजीलैंड के सामने 434 रनों का लक्ष्य
  • उरी हमले पर मायावती ने साधा PM पर निशाना, दूसरों को नसीहत और खुद की फजीहत कराते हैं...
  • KANPUR TEST LIVE: रोहित शर्मा की फिफ्टी, स्कोर-331/5
  • पैरालंपिक के दिव्यांग खिलाड़ियों ने सामान्य खिलाड़ियों से बेहतर प्रदर्शन...
  • देश में शोक और आक्रोश है, दोषियों को सजा जरूर मिलेगी: पीएम मोदी
  • #Kanpur TEST: पुजारा 78 रन बनाकर ईश सोढ़ी की गेंद पर आउट, स्कोर-228/4
  • KANPUR TEST: कप्तान कोहली 18 रन बनाकर आउट, स्कोर-214/3
  • KANPUR TEST: भारत का दूसरा विकेट गिरा, विजय 76 रन बनाकर आउट
  • पढ़िए, शशि शेखर का ब्लॉग: 'असली भारत के हक में'
  • #INDvsNZ: कानपुर टेस्ट के तीसरे दिन के 5 टर्निंग प्वाइंट्स, खेल की दुनिया की टॉप 5 खबरें...
  • मौसम अलर्ट: दिल्ली-NCR में गर्म रहेगा मौसम। लखनऊ, पटना और रांची में बारिश की...
  • सुबह की शुरुआत करने से पहले जानिए अपना भविष्यफल, जानिए आज कैसा रहेगा आपका दिन
  • सुविचार: मनुष्य का स्वाभाव है कि जब वह दूसरों के दोष देख कर हंसता है, तब उसे अपने...
  • Good Morning: पाक को PM का करारा जबाव, बदहाल यूपी पर क्या बोले राहुल, और भी बड़ी खबरें जानने...

अपराधियों के लिए सजा की मांग करने वाले हैं लोकतंत्र विरोधी

नीरज बधवार First Published:27-12-2012 07:10:21 PMLast Updated:00-00-0000 12:00:00 AM

अगर आप अलग-अलग पार्टियों के सांसदों पर नजर डालें, तो पाएंगे कि जाति, धर्म, नीतियों को लेकर इनमें कितना भी मतभेद क्यों न हो, पर एक चीज जो इन्हें आपस में जोड़ती है, वह है अपराधी। लोकसभा में 150 सांसद ऐसे हैं, जो आपराधिक पृष्ठभूमि के हैं। उनमें 71 के खिलाफ तो रेप व हत्या के मामले दर्ज हैं। अब हो सकता है किसी एक पार्टी से किसी एक जाति के लोग ज्यादा चुने जाएं और दूसरी से किसी और के, मगर जहां तक ‘अपराधियों’ की बात है, यह एकमात्र ऐसी कौम है, जिसे हर पार्टी में समान प्रतिनिधित्व हासिल है। दूसरे शब्दों में कहें, तो अपराधी भारतीय राजनीति की इकलौती ‘आम सहमति’ है।

ऐसे में, जब लोग मांग करते हैं कि बलात्कारियों को फांसी दो, हत्यारों को सूली पर चढ़ाओ, तो उनसे पूछा जा सकता है कि अगर इन्हें सजा दे दी गई, तो लोकतंत्र क्या आपके पिताजी चलाएंगे? अच्छे लोग राजनीति में आना नहीं चाहते और बुरों को बुरा बनने से पहले ही फांसी पर चढ़ा दिया जाएगा, तो चुनाव लड़ने के लिए लोग क्या हम मंगोलिया से लाएंगे? वैसे भी अभी राजनीति में एफडीआई लागू नहीं हुआ है। दूसरा, जब एक जाति विशेष का व्यक्ति चुने जाने के बाद अपने लोगों का खयाल रख सकता है, तो अपराधी क्यों नहीं? क्या उसका अपराध सिर्फ यह है कि वह अपराधी है?

रही बात इंडिया गेट पर हुए लाठीचार्ज और वहां आई लड़कियों से किसी के न मिलने की, तो इसमें भी गलती लड़कियों की थी। गलती यह कि वे वहां सिर्फ ‘लड़की’ बन इंसाफ मांगने गईं, अगर वे पहले बता देतीं कि विरोध कर रही लड़कियों में 30 फीसदी ओबीसी, 20 फीसदी एससी व 10 फीसदी मुस्लिम हैं, तो पार्टियां अपने आप उन्हें बचाने वहां पहुंच जातीं। यह कहना भी गलत है कि लड़कियों को इंसाफ नहीं मिला। इंसाफ यानी कानून के मुताबिक इंसान जो डिजर्व करे, उसे वह दिया जाए। इंडिया गेट पर धारा 144 लगी थी। बावजूद इसके लड़कियां वहां पहुंची। उन्होंने कानून तोड़ा। कानून तोड़ने पर पुलिस ने उन्हें तोड़ा। मतलब उन्हें वह मिला, जो वे डिजर्व करती थीं। क्या अब भी आपको लगता है कि उन्हें इंसाफ नहीं मिला?

लाइव हिन्दुस्तान जरूर पढ़ें

 
Hindi News से जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
Web Title:
 
 
|
 
 
अन्य खबरें
 
From around the Web
जरूर पढ़ें
क्रिकेट स्कोरबोर्ड