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मस्तिष्क की प्रसारण सेवा

रेनू सैनी First Published:25-12-2012 08:01:02 PMLast Updated:00-00-0000 12:00:00 AM

रेडियो की प्रसारण सेवा से तो सभी परिचित हैं, पर मस्तिष्क की भी एक प्रसारण सेवा होती है। मस्तिष्क में विचारों की प्रसारण सेवा लगातार जारी रहती है, जो हमें हर कार्य की सूचना देती है। यह प्रसारण सेवा ऐसी है, जिसे सिर्फ आप ही सुन और समझ सकते हैं। उसे सुनने के बाद आप अपने व्यवहार को दूसरों के सामने प्रकट करते हैं। यदि आपके दिमाग ने प्रसारित किया, ‘मैं खुश हूं’, तो आपको यही सुनाई देगा और आप वास्तव में खुश रहेंगे। इसके विपरीत यदि मस्तिष्क यह प्रसारित करता है कि ‘मैं बहुत दुखी हूं, मेरे जीने का कोई अर्थ नहीं है, मेरे लिए सब रास्ते बंद हो चुके हैं’, तो आप प्रत्यक्ष रूप से दुखी हो जाएंगे और यही मनोभाव आप दूसरों के सामने भी दर्शाएंगे। जो लोग ज्यादातर अपने मस्तिष्क में नकारात्मक व दुखी बातों को प्रसारित करते रहते हैं, कुछ समय बाद उनका स्वभाव ही नकारात्मक व दुखी सोच का हो जाता है। जेबोरियन जिबान कहते हैं कि ‘हम-आप अपने मस्तिष्क में जो विचार जमा करते हैं, वही हमारी आदतों में शुमार हो जाते हैं।

मात्र दो सप्ताह तक उन विचारों को मस्तिष्क में जमा रखने पर वे स्वभाव में बदल जाते हैं।’ कई लोग दुखी व नकारात्मक विचार अपने अंदर नहीं लाना चाहते, लेकिन वे उत्पन्न हो जाते हैं। अच्छे और बुरे विचारों का प्रसारण आपके हाथों में होता है। आप अपने बारे में बुरी बातें प्रसारित करेंगे, तो उससे निराशा, परेशानियां और तनाव ही मिलेगा। यदि अच्छे विचारों का प्रसारण आपके मस्तिष्क में होगा, तो सफलता मिलेगी। एक प्रसिद्ध विद्वान के अनुसार, ‘विल पॉवर से हम अपने मन के भय को दूर करते हैं, जबकि वेल पॉवर किसी चीज को हासिल करने के लिए एक जोश, एक जज्बा पैदा करता है। आपके पास जितना अधिक वेल पॉवर होगा, आप उतनी ही अधिक सफलता की ओर बढ़ेंगे।’ इसलिए दिमाग को ऐसा बनाएं कि वह अच्छी व सकारात्मक सूचनाएं प्रसारित कर सके।

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