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पीड़िता ने पूछा- वो पकड़े गए या नहीं

नई दिल्ली, निशि भाट First Published:18-12-2012 11:44:16 PMLast Updated:00-00-0000 12:00:00 AM

रविवार की काली रात के बाद बलात्कारियों को फांसी की सजा देने के लिए उठ रही आवाज में एक कराह उस पीड़िता की भी शामिल है जो दर्द की इंतहा को अस्पताल के बिस्तर पर झेल रही है। सफदरजंग अस्पताल में सांसों की डोर को थामे रखने की जंग लड़ रही पीड़िता ने होश में आने पर पहला सवाल किया ‘वो पकड़े गए या नहीं।’

हैवानियत की हदों को पार कर देने वाली वारदात की शिकार छात्र बोलने से लाचार है। वह लिखकर अपने दर्द को बयां कर पा रही है। असहनीय पीड़ा को हर पल परास्त कर रही पीड़िता भी चाहती है कि कानून, इन दरिंदों को कड़ी से कड़ी सजा दे।

मंगलवार को होश में आने पर उसने दूसरी ख्वाहिश अपनी मां से मिलने की जताई। मां को देखते ही लगी आंसुओं की झड़ी ने इंसानियत पर लगे धब्बों की कहानी बयां कर दी। इसके बाद कागज के चंद टुकड़ों पर हाथों लिखी बातें पीड़िता के हौसले और जज्बे की मिशाल पेश करती है।

 

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