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खुशियां बेशुमार

ब्रह्मकुमार निकुंज First Published:16-12-2012 10:53:09 PMLast Updated:00-00-0000 12:00:00 AM

तीन चीजें हैं, जिन्हें हर कोई चाहता है- ‘हेल्थ’, ‘वेल्थ’ और ‘हैप्पीनेस’ यानी सेहत, संपत्ति और खुशी। कहते हैं कि‘खुशी जैसी खुराक नहीं’ यानी जो खुश रहना जानता है, उसके जीवन में सुख ही सुख हैं। खुश रहना तो सभी चाहते हैं, पर खुश कैसे रहें, यह बहुत कम लोग जानते हैं। आज की दुनिया को देखते हुए क्या हर पल खुश रहना संभव है? कहा जाता है कि अगर मन खुश है, तो आपकी पूरी दुनिया खुश है।

विद्वानों और गुणीजनों के अनुसार, दुख कोई शाश्वत चीज नहीं है। सुख की कमी या इसके न होने को ही ‘दुख’ कहा गया है। पर हम दुखी क्यों और कैसे होते हैं? सरल भाषा मे यदि कहें, तो हम दुखी तब होते हैं, जब अपने आत्म-सम्मान की रक्षा नहीं कर पाते। जितना हम नीचे गिरते हैं, उतना हमारे जीवन में निराशा और उदासी छा जाती है। ऐसे में, हमारे मन में यह बात बैठ जाती है कि शायद हमारे जीवन में कभी खुशी का सूर्योदय होगा ही नहीं। तब हमारा लक्ष्य अपने मन को नियंत्रित कर उसे स्वस्थ करने पर होना चाहिए, न कि स्थायी खुशी हासिल करने पर। जब तक हमारा मन स्थिर नहीं होगा, तब तक हम निराशा और उदासी को अपने जीवन से भगा नहीं पाएंगे।

बुद्धिमान वह है, जो बड़ी छलांग लगाने की बजाय सफलता के छोटे-छोटे कदम भरता रहे। वह अपने मनचाहे पड़ाव पर बड़ी आसानी से पहुंच जाता है। हर एक घटना में कल्याण समाया हुआ है, ऐसी धारणा से हम हर परिस्थिति से सकारात्मक ऊर्जा हासिल कर सकते हैं। अपने आस-पास घटने वाली घटनाओं से भी हम बहुत कुछ सीख सकते हैं। अगर कोई गलती करता है, तो उससे भी हमें कुछ न कुछ सीख मिलती है। जीवन में सकारात्मक दृष्टिकोण रखने से हम चौंकाने वाले परिणाम पा सकते हैं। इसीलिए सकारात्मक नजरिये को विकसित करके हर हालत में खुश रहने का प्रयास करना चाहिए। ऐसी कोशिश ही जीवन को सफल बनाती है।

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