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आतंकवादियों से लोहा लेने वाली लगा रही झाड़ू

नई दिल्ली, रमेश त्रिपाठी First Published:12-12-2012 11:35:59 PMLast Updated:00-00-0000 12:00:00 AM

उसका नाम राधा चौरान है। 11 साल पहले जब संसद पर आतंकी हमला हुआ, उसने आतंकियों से लोहा लिया। तब वह होमगार्ड में थी। आज वह झाड़ लगाकर गुजर-बसर कर रही है।

हमले के बाद सरकार ने मारे गए और घायल सुरक्षाकर्मियों के लिए मुआवजे की घोषणा की थी। लेकिन राधा तक राहत नहीं पहुंच सकी। पहले आतंकियों, फिर किस्मत और उसके बाद व्यवस्था से मिले जख्मों की टीस लिए वह सरकारी दफ्तरों की खाक छान रही है। उसकी अर्जी फाइलों के अंबार में जाने कहां दबकर रह गई है। राधा बताती है, ‘13 दिसंबर 2001 को जिस दिन संसद पर हमला हुआ, वह संसद भवन के गेट नंबर-5 की रेड लाइट पर ट्रैफिक संभाल रहे पुलिस के जवानों के साथ तैनात थी। आसपास अचानक ताबड़तोड़ गोलियां चलने लगीं। हमने आनन-फानन में पोजीशन ले ली। तड़-तड़ की आवाज आ रही थी। पहले तो समझ ही नहीं आया कि गोलियां चल किधर से रही हैं। तभी लड़खड़ाती एक साथी महिला सुरक्षाकर्मी को बचाने की कोशिश के दौरान मेरे बाएं पैर और कमर में गोली लगी। मैं बेहोश हो गई। अगले दिन आंख खुली तो खुद को राम मनोहर लोहिया अस्पताल (आरएमएल) के बेड पर पाया।’ वह जब ठीक होकर होमगार्ड कार्यालय पहुंची तो बताया गया कि उसकी नौकरी नहीं रही।

इसके बाद शुरू हुआ न्याय का संघर्ष खत्म नहीं हुआ। इस बीच पति की मृत्यु हो गई। जब कोई सरकारी मदद नहीं मिली तो पीडब्लूडी में साफ-सफाई का काम देखने वाले एक ठेकेदार के यहां चार हजार रुपये महीने की नौकरी कर ली। आज वह झाड़ मार रही है।  

 

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