Image Loading
मंगलवार, 24 मई, 2016 | 13:32 | IST
 |  Image Loading
ब्रेकिंग
  • एक क्लिक में जानें, अब तक की पांच बडी़ खबरें
  • सुप्रीम कोर्ट का सूखा प्रभावित राज्य में शराब बनाने वाली कंपनियों को पूरी तरह...
  • लखनऊ, चंडीगढ़, फरीदाबाद, अगरतला समेत 13 नए शहर स्मार्ट सिटी के लिए चुने गए
  • राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने NEET अध्यादेश पर किए हस्ताक्षर
  • इसी सप्ताह आएगा 10वीं का परीक्षा परिणामः सीबीएसई
  • VIDEO: देखें क्या हुआ जब घुप्प अंधेरे के बीच दिल्ली-NCR में कड़की बिजली
  • शेयर बाजार: सेंसेक्स 10 अंक फिसलकर 25,220 पर खुला, निफ़्टी 7731
  • एक क्लिक में जानें 5 बड़ी खबरें, जिन पर रहेगी नजर
  • दिल्ली: खराब मौसम के कारण करीब 24 उड़ानें डाइवर्ट हुईं और 12 देर से पहुंचीं
  • ब्रेड में मिले जानलेवा कैमिकल, कैंसर का खतरा
  • बिहार- एमएलसी मनोरमा देवी की जमानत याचिका पर सुनवाई, कोर्ट ने मांगी केस डायरी
  • दिल्ली: नरेला स्थित प्लास्टिक फैक्ट्री में लगी भीषण आग

उनकी कुल्हाड़ी ही है जगन्नाथ

राजेन्द्र धोड़पकर First Published:12-12-2012 10:13:30 PMLast Updated:00-00-0000 12:00:00 AM

भाजपा और वाम दलों ने आखिरकार अपना एक पंचवार्षिक आयोजन पूरा कर लिया। आयोजन यह है कि जब लोकसभा चुनाव करीब हों और कांग्रेसी निकम्मेपन, भ्रष्टाचार वगैरह आरोपों से घिरे हुए चुनाव हारने को तैयार हों और यह लगे कि विपक्षी बिना किसी कोशिश के जीत सकते हैं, तब ये दोनों शक्तियां बड़ी मेहनत से एक कुल्हाड़ी ढूंढ़कर लाती हैं और मिलकर उस पर धार चढ़ाती हैं।  परस्पर सहयोग से ये दोनों शक्तियां अपना-अपना पैर कुल्हाड़ी पर दे मारती हैं, वामपंथी भाजपा के दाहिनी ओर खड़े होते हैं, ताकि वे वामपंथी होने के नाते बायां पैर मार सकें और भाजपाई वामपंथियों के वाम में खड़े होते हैं, ताकि वे दाहिना पैर मार सकें। कांग्रेसी इसे देख अपने-अपने कामों में लग जाते हैं, जो ठीक-ठीक क्या हैं, किसी को नहीं पता।

पिछले चुनाव के पहले परमाणु समझौता नामक कुल्हाड़ी थी, इस बार खुदरा व्यापार में विदेशी निवेश नामक कुल्हाड़ी है। अब दोनों राष्ट्रहित के नाम पर अपने-अपने पैरों पर भारी मरहम-पट्टी किए बैठे हैं और अगर अब भी सत्तारूढ़ गठबंधन चुनाव हारता है, तो यह उसकी प्रतिभा ही कही जानी चाहिए। भाजपाइयों की दिक्कत यह है कि वह हर उस चीज को राष्ट्रविरोधी मानते हैं, जिसे कांग्रेसी करते हैं। मसलन, भ्रष्टाचार, निकम्मापन वगैरह और वे हर उस चीज को राष्ट्रवादी मानते हैं, जो वे खुद करते हैं, मसलन भ्रष्टाचार, निकम्मापन वगैरह। वामपंथी तो भाजपाइयों से भी ज्यादा उग्र राष्ट्रवादी हो गए हैं। जब सोवियत साम्राज्य था और चीन में माओ का राज था, तब वे विचारों से लेकर आचार तक, सब विदेश से आयात करते थे। पर अब वामपंथियों के पास भारत के अलावा कोई देश ही नहीं बचा, सो मजबूरी में वह उग्र राष्ट्रवादी हो गए, हर विदेशी चीज का विरोध करने लगे। अब वामपंथी अपना बायां हाथ भाजपाइयों के दाहिने हाथ में थमाकर कुल्हाड़ी की तलाश में निकलते हैं, क्योंकि उससे ज्यादा आधुनिक कोई भी औजार या हथियार राष्ट्रवाद की भावना के खिलाफ है। वे ये करते हैं तो करें, पर लोकतंत्र में कांग्रेस का ऐसा विकल्प भी तो होना चाहिए, जिसकी दोनों टांगें साबुत और मजबूत हों।

 
 
 
 
|
 
 
अन्य खबरें
 
देखिये जरूर
जरूर पढ़ें
Jharkhand Board Result 2016
Assembely Election Result 2016
क्रिकेट स्कोरबोर्ड
क्रिकेट
5 साल से नंबर-2 टीम जीती है IPL, इस बार कोहली की RCB का नंबर5 साल से नंबर-2 टीम जीती है IPL, इस बार कोहली की RCB का नंबर
इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के 9वें सीजन में विराट कोहली की कप्तानी वाली रॉयल चैलेंजर्स बेंगलोर (आरसीबी) विजेता बन सकती है। पिछले पांच साल से आईपीएल में वो ही टीम चैम्पियन बनी है जो लीग मैचों के दौरान नंबर दो पर रही हो।