Image Loading
बुधवार, 28 सितम्बर, 2016 | 12:21 | IST
Mobile Offers Flipkart Mobiles Snapdeal Mobiles Amazon Mobiles Shopclues Mobiles
खोजें
ब्रेकिंग
  • लोढ़ा पैनल ने सुप्रीम कोर्ट को कहा, बीसीसीआई हमारे सुझावों और दिशा निर्देशों का...
  • पाकिस्तानी कलाकारों फवाद, माहिरा और अली जफर के भारत छोड़ने पर बॉलीवुड सितारों...
  • टीम इंडिया में गंभीर की वापसी, भारत-न्यूजीलैंड टेस्ट के टिकट होंगे सस्ते। इसके...
  • मौसम अलर्ट: दिल्ली-NCR वालों को गर्मी से नहीं मिलेगी राहत। रांची, लखनऊ और देहरादून...
  • भविष्यफल: तुला राशि वालों को आज परिवार का भरपूर सहयोग मिलेगा, मन प्रसन्न रहेगा।...
  • हिन्दुस्तान सुविचार: जीवन के बुरे हादसे या असफलताओं को वरदान में बदलने की ताकत...
  • सार्क में हिस्सा नहीं लेंगे पीएम मोदी, गंभीर की दो साल बाद टीम इंडिया में वापसी,...
  • क्रिकेटर बालाजी 'रजनीकांत' के फैन हैं, आज बर्थडे है उनका। उनकी जिंदगी से जुड़े...

विपरीत परिस्थितियों में इन्होंने भी छुआ शिखर

First Published:09-12-2012 11:35:33 PMLast Updated:00-00-0000 12:00:00 AM

नोएडा। कार्यालय संवाददाता

किसान परिवार में जन्में परविंदर का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट तक पहुंचना आसान नहीं था। संयुक्त परिवार में पले परविंदर के पास भी क्रिकेट प्रशिक्षण के दौरान दिक्कतें आईं। पिता की मौत के बाद तो परविंदर का क्रिकेट लगभग छूट गया था, लेकिन भाई रतिंदर के सहयोग के बाद धीरे धीरे क्रिकेट की ओर दोबारा अग्रसर हुए।

परविंदर के अलावा कई अन्य खिलाड़ी हैं जो विपरित परिस्थितियों में नया मुकाम हासिल किया। एशियाई कबड्डी चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय टीम की सदस्य रहीं अनीता मावी घर की आर्थिक स्थिति खराब होने के बावजूद भी कबड्डी को जिंदगी समझा। खेतों में फसल काटने का काम करने के बावजूद भी कई अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में भारत का प्रतिनिधित्व किया। नोएडा कॉलेज ऑफ फिजिकल एजुकेशन से शिक्षा ग्रहण कर चुकी अनीता अब खेल छोड़ चुकी हैं और हरियाणा के एक गांव में जिंदगी बिता रही हैं।

इसी तरह एथलेटिक्स में दिल्ली का प्रतिनिधित्व करने वाले सुजीत कुमार के पिता भी किसान है। लिहाजा पैसों के अभाव में इस उभरते खिलाड़ी को पार्ट टाइम नौकरी करनी पड़ी। दिल्ली विश्वविद्यालय में दाखिले के बाद पार्ट टाइम नौकरी छोड़नी पड़ी ऐसे में फिर से तंगी में जी रहे इस खिलाड़ी को नोएडा के सेक्टर-22 का किराए का घर छोड़कर खोड़ा कालोनी में रहना पड़ रहा है। सुजीत ने हाफ मैराथन, 5000 मीटर व दौड़् की कई अन्य राष्ट्रीय प्रतियोगतिाओं में बेहतर प्रदर्शन कर चुके हैं।

प्रोफेशनल गोल्फर प्रदीप भी कैडी के रूप में नोएडा गोल्फ कोर्स से जुड़े थे। प्रत्येक दिन 50 रुपए की कमाई हो जाती थी। पिता सब्जी बेचते थे। लिहाजा पिता के सहयोग के लिए प्रदीप भी 12 वर्ष की उम्र से ही काम में जुट गए। धीरे धीरे गोल्फ में इनकी रुचि जगी, लेकिन महंगा खेल होने के कारण इसका प्रशिक्षण प्रदीप के वश की बात नहीं थी। ऐसे में जो गोल्फर यहां प्रशिक्षण के लिए आते उनसे गोल्फ स्टिक मांगकर कुछ शॉट लगा लेते।

प्रदीप का प्रशिक्षण इसी तरह चलता रहा और यह खिलाड़ी अब प्रोफेशनल गोल्फर बन गया है। प्रदीप ने एशियन टूर में भी अपनी प्रतिभा दिखाई है। कराटे खिलाड़ी अंजना ने भी मुश्किल वक्त में भी खेल से अलग नहीं हुई। पिता पानी बेचने का काम करते हैं ऐसे में अंजना के लिए कराटे का प्रशिक्षण करना मुश्किलों भरा था, लेकिन प्रशिक्षक के सहयोग के बाद अंजना ने कई अंतरराष्ट्रीय मेडल जीतकर शहर का नाम रोशन किया। रितिक चला चाचा की राहपरविंदर अवाना का भतीजा रितिक अवाना भी क्रिकेट का उम्दा खिलाड़ी है।

10 वर्ष की उम्र में ही रितिक में बेहतरीन क्रिकेटर दिखता है। दो वर्ष से क्रिकेट का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे रितिक अवाना स्कूली क्रिकेट में अब तक तीन अर्धशतक ठोक चुके हैं। बल्लेबाजी में इनकी खासियत यह रही है कि ज्यादातर मौके पर यह अविजित रहे हैं। परविंदर व रितिक में अलग बात यह है कि परविंदर तेज गेंदबाज हैं तो रितिक बल्लेबाज। हालांकि रितिक अब गेंदबाजी भी करने लगे हैं। चाचा के क्रिकेट को देखकर ही रितिक इस खेल से जुड़ा।

लिहाजा परविंदर भी इस नन्हें खिलाड़ी को बेहतर क्रिकेट के लिए प्रेरित करते हैं। जब भी परविंदर घर आते हैं रितिक को क्रिकेट की बारीकियां बताना नहीं भूलते हैं। रितिक भी चाचा के ज्ञान को गंभीरता से सुनता है और अमल करता है। राजेश।

लाइव हिन्दुस्तान जरूर पढ़ें

 
Hindi News से जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
Web Title:
 
 
 
 
अन्य खबरें
 
From around the Web
जरूर पढ़ें
क्रिकेट स्कोरबोर्ड