Image Loading
रविवार, 25 सितम्बर, 2016 | 14:21 | IST
Mobile Offers Flipkart Mobiles Snapdeal Mobiles Amazon Mobiles Shopclues Mobiles
खोजें
ब्रेकिंग
  • KANPUR TEST: भारत की पारी घोषित, न्यूजीलैंड के सामने 434 रनों का लक्ष्य
  • उरी हमले पर मायावती ने साधा PM पर निशाना, दूसरों को नसीहत और खुद की फजीहत कराते हैं...
  • KANPUR TEST LIVE: रोहित शर्मा की फिफ्टी, स्कोर-331/5
  • पैरालंपिक के दिव्यांग खिलाड़ियों ने सामान्य खिलाड़ियों से बेहतर प्रदर्शन...
  • देश में शोक और आक्रोश है, दोषियों को सजा जरूर मिलेगी: पीएम मोदी
  • #Kanpur TEST: पुजारा 78 रन बनाकर ईश सोढ़ी की गेंद पर आउट, स्कोर-228/4
  • KANPUR TEST: कप्तान कोहली 18 रन बनाकर आउट, स्कोर-214/3
  • KANPUR TEST: भारत का दूसरा विकेट गिरा, विजय 76 रन बनाकर आउट
  • पढ़िए, शशि शेखर का ब्लॉग: 'असली भारत के हक में'
  • #INDvsNZ: कानपुर टेस्ट के तीसरे दिन के 5 टर्निंग प्वाइंट्स, खेल की दुनिया की टॉप 5 खबरें...
  • मौसम अलर्ट: दिल्ली-NCR में गर्म रहेगा मौसम। लखनऊ, पटना और रांची में बारिश की...
  • सुबह की शुरुआत करने से पहले जानिए अपना भविष्यफल, जानिए आज कैसा रहेगा आपका दिन
  • सुविचार: मनुष्य का स्वाभाव है कि जब वह दूसरों के दोष देख कर हंसता है, तब उसे अपने...
  • Good Morning: पाक को PM का करारा जबाव, बदहाल यूपी पर क्या बोले राहुल, और भी बड़ी खबरें जानने...

दो अतियों के बीच

राजीव कटारा First Published:07-12-2012 07:29:32 PMLast Updated:00-00-0000 12:00:00 AM

बड़े अरमानों से वह प्रोजेक्ट शुरू हुआ था। अपनी पूरी टीम को भी जुटा दिया था। लेकिन अब उन्हें लगने लगा था कि सब कुछ किसी और दिशा में जा रहा है। उनकी नींद उड़ने लगी थी। कोई भी प्रोजेक्ट हमेशा सोची हुई लकीर पर नहीं जाता। शायद इसीलिए डॉ. रिक हार्वे कहते हैं, ‘कुछ भी करने से पहले सोच लो कि उसमें बेहतरीन क्या हो सकता है? और सबसे खराब क्या हो सकता है? तब हम बेकार की चिंताओं से बच जाते हैं।’ वह सैन फ्रैंसिस्को स्टेट यूनिवर्सिटी में हैल्थ ऐजुकेशन और हॉलिस्टिक हैल्थ के एसोसिएट प्रोफेसर हैं। बेहतरीन होने पर तो अच्छा लगना ही है। अगर कुछ बहुत खराब भी होता है, तो हमें उतना बुरा नहीं लगता। हम उसके लिए भी तैयार होते हैं। यह तैयार होना सचमुच मायने रखता है। अगर बहुत अच्छा हो जाता है, तो हम बौरा नहीं जाते। और बुरा होता है, तो हम ढह नहीं जाते। कुल मिलाकर, हम दोनों हालात के लिए तैयार होते हैं। हम जब किसी काम में जुटते हैं, तो अक्सर अच्छा ही अच्छा सोचते हैं। बुरा सोचना हमें अच्छा नहीं लगता। इसलिए उस ओर हम देखते ही नहीं। कभी-कभी चीजें जब खराबी की ओर जाने लगती हैं, तो हम परेशान होते हैं।

हमें जोर का झटका लगता है। यही जोर का झटका हमें धीरे से लगे। उसके लिए जरूरी है कि हम बहुत खराब को भी जेहन में रख लें। तब शायद हमें बुरा तो लगेगा, लेकिन कुछ लुटा हुआ-सा महसूस नहीं होगा। हमारी जिंदगी में अक्सर चीजें कहीं बीच में ही होती हैं। बेहतरीन और बर्बादी के बीचोबीच ही हम खड़े होते हैं। दोनों अतियों पर अगर हम सोच लें, तो फिर बात ही क्या है? तब हम इधर-उधर हिल-डुल तो सकते हैं, लेकिन ठोस जमीन पर खड़े रहते हैं। जिंदगी जीने के लिए यही ठोस जमीन जरूरी होती है।

लाइव हिन्दुस्तान जरूर पढ़ें

 
Hindi News से जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
Web Title:
 
 
|
 
 
अन्य खबरें
 
From around the Web
जरूर पढ़ें
क्रिकेट स्कोरबोर्ड