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लिफ्ट में 20 मिनट तक फंसे रहे तीन बच्चे

First Published:05-12-2012 11:37:11 PMLast Updated:00-00-0000 12:00:00 AM

ट्रांस हिंडन। हमारे संवाददाता

अंधेरे कमरे में बहुत डर लग रहा था, ऐसा लगा कि अब कभी बाहर निकल ही नहीं पाएंगे। अब मैं कभी भी लिफ्ट में नहीं जाउंगा..ये शब्द हैं चार वर्षीय हर्ष जैन के, जिसने आरडब्यूए की लापरवाही के चलते एक बंद लिफ्ट में डरावना अनुभव लिया। मंगलवार को इंदिरापुरम इलाके के वैभव खंड में लोटस पोंड सोसायटी की लिफ्ट में तीन बच्चों ने लगभग 20 मिनट तक बंद लिफ्ट में दहशत का वक्त काटा। स्कूल से घर लौट रहे ये तीन बच्चों अचानक लिफ्ट के अटकने से लिफ्ट में बंद हो गए।

किसी तरह रेजीडेंट्स ने बच्चों को सकुशल बाहर निकाला। इस मामले में आरडब्ल्यूए पदाधिकारियों से शिकायत करने पर उन्होंने मामले से पल्ला झाड़ लिया। लोटल पोंड सोसाइटी की 11वीं मंजिल पर अभिनव जैन परिवार सहित रहते हैं। उनकी पत्नी प्रीति मंगलवार को जब बच्चों को स्कूल से लेकर लौट रही थी, इस दौरान ये घटना हुई। प्रीति ने बताया कि चौथी मंजिल पर अचानक लिफ्ट अटक गई। बच्चों ने जोर-जोर से रोना शुरू कर दिया। न तो लिफ्ट में फोन का सिग्नल था और ना ही किसी ने चिल्लाने की आवाज सुनी।

लगभग 20 मिनट तक शोर मचाते रहे। काफी देर बाद गार्ड ने आवाज सुनी और लोगों की मदद से लिफ्ट से सभी को बाहर निकाला। अभी तक इतनी दहशत है कि 11वीं मंजिल तक सीढिम्यों से ही आना-जाना कर रहे हैं। बच्चों तो लिफ्ट से घबराने ही लगे हैं। संबंधित सोसाइटी में लिफ्ट की मेंटेनेंस का जिम्मा आरडब्ल्यूए के पास है।

इस तरह की घटनाएं तो आए दिन होती रहती है, इसमें कोई बड़ी बात नहीं है। लिफ्ट की मेंटेनेंस का जिम्मा आरडब्ल्यूए के पास है।

आरके आनंद, आरडब्ल्यूए अध्यक्ष, लोट पोंड

किसी भी सोसाइटी में इस तरह की घटना बिल्डर और आरडब्ल्यूए की लापरवाही को दर्शाती है। ऐसी घटनाओं से कई सोसाइटियों में लोग परेशान हं। फेडरेशन सोसाइटी के लोगों के साथ हैं। अगर रेजीडेंट्स चाहेंगे तो आरडब्ल्यूए के खिलाफ आवाज उठाएंगे। आलोक कुमार, वाइस चेयरमैन, आरडब्ल्यूए फेडरेशन गाजियाबाद

रेजीडेंट्स की सुरक्षा की जिम्मेदारी आरडब्ल्यूए की है। आरडब्ल्यूए की गैर जिम्मेदाराना हरकत बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अगर आरडब्ल्यूए सेसिंटवि नहीं है तो उन्हे पद पर बने रहने का हक नहीं है।

संजय सिंह, आरडब्ल्यूए पदाधिकारी----आरडब्लयूए जब मेंटेनेंस के नाम पर शुल्क वसूलती है तो उसे रेजीडेंट्स की सुविधा का भी पूरा ध्यान देना चाहिए। जिम्मेदारी नहीं निभा पा रहे आरडब्ल्यूए सदस्यों को पद से हटा देना चाहिए। मोहन सांगवान, कंफेडरेशन ऑफ महासचवि ---सोसाइटी में आए दिन इस तरह की घटनाएं होती रहती हैं। आरडब्ल्यूए से शिकायत करने पर पैसे नहीं होने की बात कहकर टाल दिया जाता है, जबकि रेजीडेंट्स से मेंटेनेंस के नाम पर हर फ्लैट से 2200 रुपए महीना लिया जाता है।

अभिनव जैन, निवासी, लोटस पोंड---

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