Image Loading
गुरुवार, 02 मार्च, 2017 | 01:36 | IST
Mobile Offers Flipkart Mobiles Snapdeal Mobiles Amazon Mobiles Shopclues Mobiles
खोजें
ब्रेकिंग
  • विराट कोहली को पॉली उमरीगर, अश्विन को मिलेगा दिलीप सरदेसाई अवार्ड, पूरी खबर...
  • रविचंद्रन अश्विन को 2016 में द्विपक्षीय सीरीज में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए...
  • विराट कोहली को भारत के साल के सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर के लिए पाली...
  • बिहार: नमामि गंगे मिशन के लिए पटना को 1050 करोड़ रुपये
  • SBI में 1 अप्रैल से और HDFC में आज से ATM से पैसा निकालना हुआ महंगा, पूरी खबर पढ़ने के लिए...

शिकायत और शर्त

लाजपत राय सभरवाल First Published:04-12-2012 07:24:19 PMLast Updated:00-00-0000 12:00:00 AM

हम कई बार शिकायत करते हैं कि सब कुछ हमारे मन के मुताबिक नहीं हो रहा। हम जो चाहते हैं, वह नहीं होता है। अपेक्षा करते हैं, पूरी नहीं होती है, और इसी सबसे शुरू होती है शिकायत। यह प्रत्यक्ष अस्तित्व में होती नहीं है, परंतु परेशान बहुत करती है। यह आभासी चुभन हमें कभी चैन से रहने नहीं देती है। कोई हमारे लिए कितना भी करे, हम शिकायत के कटु व्यंग्य को रोक ही नहीं पाते। औरों को छलनी तो करते ही हैं, हम भी इस असहनीय पीड़ा से त्रस्त रहते हैं। कहा जाता है कि अगर शिकायती के चरणों में तीनों लोक का वैभव भी रख दिया जाए, तो भी वह उसमें कुछ नुक्स निकाल ही लेगा। कोई मिला नहीं कि पूर्व नियोजित शिकायतों का पुलिंदा खोलकर रख देते हैं। हमारी शिकायत औरों से होती है, संबंधों और रिश्तों से होती है। यहां तो ठीक है, कई बार यह खुद से भी होती है।

ऐसे व्यक्ति हमेशा ही शर्तों का, उम्मीदों का, अपेक्षाओं का पहाड़ खड़ा करते हैं, जिनके पूरा न होने पर शिकायतें पनपती हैं। संत और साधु शिकायत नहीं करते और न कोई शर्त रखते हैं। संत का तात्पर्य ही है, कष्टों, मुसीबतों और संभावनाओं में भी शांतभाव से रहकर किसी तरह की शिकायत किए बिना जन-कल्याण में लगे रहना। साधु का अर्थ है, शर्तो से परे अपनी साधुता को सेवा के महायज्ञ में सतत समर्पित करते रहना। सच्चे साधु-संतों के जीवन में शिकायत और शर्त का अंश मात्र भी नहीं रहता।

लेकिन एक इंसान आखिर शिकायत और शर्त से मुक्त कैसे हो? शिकायत से मुक्ति की एक शर्त है, प्यार बांटें, सम्मान बिखेरें, अपनापन लुटाएं। ये अनमोल थाती हैं, जिन्हें भगवान ने हमें मुक्तहस्त से प्रदान किया है और हम भी इसे खुले हाथों बांटें। आगे बढ़ें, तो दूसरों को साथ लेकर चलें। और रुकें, तो सबको छाया देने वाला बरगद बन जाए। फिर कोई शिकायत नहीं बचेगी।

जरूर पढ़ें

 
Hindi News से जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
Web Title:
 
 
|
 
 
अन्य खबरें
 
From around the Web
जरूर पढ़ें
Jharkhand Board Result 2016
क्रिकेट स्कोरबोर्ड