Image Loading
सोमवार, 26 सितम्बर, 2016 | 19:23 | IST
Mobile Offers Flipkart Mobiles Snapdeal Mobiles Amazon Mobiles Shopclues Mobiles
खोजें
ब्रेकिंग
  • सयुंक्त राष्ट्र में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने हिंदी में भाषण शुरू किया
  • अमेरिका: हयूस्टन के एक मॉल में गोलीबारी, कई लोग घायल, संदिग्ध मारा गया: अमेरिकी...
  • सिंधु जल समझौते पर सख्त हुई सरकार, पाकिस्तान को पानी रोका जा सकता है: TV Reports
  • सेंसेक्स 373.94 अंकों की गिरावट के साथ 28294.28 पर हुआ बंद
  • जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में ग्रेनेड हमला, CRPF के पांच जवान घायल
  • सीतापुर में रोड शो के दौरान कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी पर जूता फेंका गया।
  • कानपुर टेस्ट जीत भारत ने पाकिस्तान से छीना नंबर-1 का ताज
  • KANPUR TEST: भारत ने जीता 500वां टेस्ट मैच, अश्विन ने झटके छह विकेट
  • 'ANTI-INDIAN TWEETS' करने पर PAK एक्टर मार्क अनवर को ब्रिटिश सीरियल से बाहर कर दिया गया। ऐसी ही...
  • इसरो का बड़ा मिशन: श्रीहरिकोटा से PSLV-35 आठ उपग्रहों को लेकर अंतरिक्ष के लिए हुआ...
  • सुबह की शुरुआत करने से पहले पढ़िए अपना भविष्यफल, जानें आज का दिन आपके लिए कैसा...
  • हिन्दुस्तान सुविचार: मैं ऐसे धर्म को मानता हूँ जो स्वतंत्रता , समानता और ...

गरीबी कम करने के लिए उच्च वृद्धि की जरूरत: मोंटेक

नई दिल्ली, एजेंसी First Published:01-12-2012 10:03:41 PMLast Updated:01-12-2012 11:38:09 PM
गरीबी कम करने के लिए उच्च वृद्धि की जरूरत: मोंटेक

योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने शनिवार को कहा कि आर्थिक वृद्धि की चाल तेज नहीं हुई तो देश में गरीबी कम होने की रफ्तार धीमी पड़ जाएगी।

अहलूवालिया ने यहां एक चर्चा में कहा यदि आप सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर को उच्च वृद्धि के रास्ते पर नहीं लाते तो गरीबी घटाने की रफ्तार कम होगी।

उन्होंने कहा कि चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही के दौरान सकल घरेलू उत्पाद की वद्धि दर 5.4 फीसदी रही और यही हाल रहा तो चालू वित्त वर्ष में हमारा प्रदर्शन बहुत खराब होगा। यह दर वित्त वर्ष 2011-12 की अप्रैल से सितंबर अवधि में रही 7.3 फीसदी की वृद्धि से काफी नीचे है।

योजना आयोग के आकलन के मुताबिक 2004 तक 10 साल के दौरान गरीबी कम होने की रफ्तार औसतन 0.8 फीसदी सालाना रही। इसके बाद 2011 तक इसकी रफतार बढ़कर सालाना दो फीसदी तक हो गई थी।

उन्होंने कहा यदि आप पिछले सात साल 2004-2011 पर नजर डालें तो गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों की संख्या सालाना दो फीसदी की दर से घटी। 2004-05 से पहले पिछले 10 साल में गरीबी घटने की दर 0.8 फीसदी थी।

अहलूवालिया के मुताबिक उच्च वृद्धि दर के कारण 2007 से 2012 के दौरान 11वीं पंचवर्षीय योजना में वास्तविक मजदूरी में जोरदार बढ़ोतरी हुई। उन्होंने कहा 2007 से बाद के दौर में वास्तविक मजदूरी पहले की अपेक्षा चार गुनी तेजी से बढ़ी। यह कहना सही नहीं है कि उच्च वृद्धि के कारण किसी को भी फायदा नहीं हुआ।

उन्होंने कहा कि पिछले साल में सरकार ने अच्छा काम किया क्योंकि सकल घरेलू उत्पाद की वद्धि दर में बढ़ोतरी के कारण गरीबी घटने की रफ्तार तेज थी।

योजना आयोग के उपाध्यक्ष ने कहा कि भारत में समावेशी वृद्धि तभी संभव होगी जबकि लोगों की आय अधिक होगी और इससे उन्हें सामाजिक न्याय मिलेगा।
उन्होंने लोगों का कौशल बढ़ाने की जरूरत पर बल दिया ताकि उन्हें ग्रामीण इलाकों में गैर कृषि क्षेत्र में ज्यादा वेतन वाली नौकरी मिल सके।
वर्ष 2008 के आर्थिक संकट से पहले नौ प्रतिशत की उच्च आर्थिक वृद्धि हासिल करने के बाद अर्थव्यवस्था की वृद्धि 2011-12 में 6.5 प्रतिशत रह गई। चालू वित्त वर्ष के दौरान इसके और घटने की आशंका व्यक्त की जा रही है। 2012-13 की दूसरी तिमाही में आर्थिक वृद्धि 5.3 प्रतिशत रही जबकि पहली तिमाही में यह 5.5 प्रतिशत रही थी।

लाइव हिन्दुस्तान जरूर पढ़ें

 
Hindi News से जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
Web Title:
 
 
|
 
 
अन्य खबरें
 
From around the Web
जरूर पढ़ें
क्रिकेट स्कोरबोर्ड