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फिलीस्तीन ने दर्ज की संयुक्त राष्ट्र महासभा में ऐतिहासिक जीत

संयुक्त राष्ट्र, एजेंसी First Published:30-11-2012 09:07:44 PMLast Updated:00-00-0000 12:00:00 AM
फिलीस्तीन ने दर्ज की संयुक्त राष्ट्र महासभा में ऐतिहासिक जीत

फिलीस्तीन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में हुए एक ऐतिहासिक मतदान में जबर्दस्त जीत दर्ज की जिससे इस्राइल और उसका प्रमुख समर्थक अमेरिका अलगाव में चले गए और विश्व निकाय में उसका दर्जा बढ़कर गैर सदस्यीय पर्यवेक्षक का हो जाएगा।

विश्व समुदाय के अभुतपूर्व समर्थन और संयुक्त राष्ट्र में शानदार जीत पर गाजा और पश्चिमी तट में जश्न का सिलसिला शुरू हो गया। संयुक्त राष्ट्र महासभा में फिलीस्तीन को अपरिहार्य समर्थन मिला। मतदान में उसकी जीत राष्ट्र बनने के उसके सपने को और करीब ले आयी है।

भारत समर्थित इस प्रस्ताव के पक्ष में 138 देशों ने मतदान किया। 193 सदस्यीय महासभा में अब फिलीस्तीन का दर्जा बढ़कर गैर-सदस्य पर्यवेक्षक राष्ट्र का हो जाएगा।

अमेरिका और इस्राइल के लिए बड़ा राजनयिक झटका है जिन्होंने फिलीस्तीन के प्रयास का कड़ा विरोध किया था। अमेरिका, इस्राइल, कनाडा और चेक गणराज्य सहित महज नौ देशों ने प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया। ब्रिटेन समेत 41 देश मतदान से अनुपस्थित रहे। ब्रिटेन ने कल ही कहा था कि वह मतदान में भाग नहीं लेगा।

मतदान से पहले फिलीस्तीन प्राधिकार के अध्यक्ष महमूद अब्बास ने कहा था कि फिलीस्तीन राष्ट्र को जन्म प्रमाण पत्र जारी करने और शांति के अवसर को बचाए रखना अब संयुक्त राष्ट्र की नैतिक और ऐतिहासिक जिम्मेदारी है।

फिलीस्तीन के प्रतिनिधिमंडल ने महासभा के सभागार के भीतर फिलीस्तीन झंडा उठा रखा था और जैसे ही मतदान के परिणाम की घोषणा हुई सभी खुशी से झूम उठे और उन्होंने एक-दूसरे से गले मिलकर सबको बधाई दी।

मतदान के बाद संवाददाताओं से बात करते हुए संयुक्त राष्ट्र में फिलीस्तीन के दूत रियाद मंसूर ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि वह सुरक्षा परिषद में उनके प्रयास का विरोध खत्म होने पर जल्द ही संयुक्त राष्ट्र की इमारत के बाहर अन्य 193 देशों के साथ ही फिलीस्तीन का झंडा भी लहाराता हुआ देखेंगे।

उन्होंने कहा कि स्थाई शांति हासिल करने के लिए फिलीस्तीन हमेशा से वार्ता के लिए तैयार रहा है। दूसरी ओर अमेरिका ने फिलीस्तीन के प्रस्ताव को दुर्भाग्यपूर्ण और विकास विरोधी बताया जबकि इस्राइल का कहना है कि फिलीस्तीन केवल वार्ता के माध्यम से ही राष्ट्र का दर्जा प्राप्त कर सकते हैं।

यह मतदान संयुक्त राष्ट्र की ओर से घोषित फिलीस्तीनियों के साथ वार्षिक अंतरराष्ट्रीय एकजुटता दिवस के दिन हुआ है। इस मतदान से फिलीस्तीन हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय अपराध अदालत (आईसीसी) जैसी संस्थाओं तक पहुंच बनाने में सक्षम हो सकता है जो नरंसहार, युद्ध अपराध और मानवाधिकार उल्लंघन के बड़े मामलों में अभियोग चलाती है। ब्रिटेन सरीखे कुछ इस्राइल समर्थक देशों का कहना है कि फिलीस्तीन आईसीसी तक पहुंच का उपयोग इस्राइल के खिलाफ शिकायत करने के लिए कर सकता है।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने कहा कि महासभा में एक महत्वपूर्ण मतदान हुआ है। हालांकि अमेरिका ने कहा कि इस्राइल तथा फिलीस्तीन केवल प्रत्यक्ष वार्ता के जरिए ही स्थाई शांति हासिल कर सकते हैं, न कि यहां इस सभागार में हरे रंग का मतदान बटन दबाकर।

संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की स्थाई प्रतिनिधि सूसन राइस ने कहा कि आज दुर्भाग्यपूर्ण और प्रतिकूल प्रस्ताव पेश किया गया जिससे शांति की राह में और बाधा आ गई है। उन्होंने कहा कि इस प्रस्ताव से ना तो जमीनी स्तर पर कोई बदलाव नहीं होगा और नाहीं राष्ट्र बनेगा जिसको कोई अस्तित्व ही नहीं है।

उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव फिलीस्तीन राष्ट्र की स्थापना नहीं करता है। संयुक्त राष्ट्र में इस्राइल के स्थाई प्रतिनिधि रोन प्रोसोर ने कहा कि इस्राइल अपनी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा और फिलीस्तीन को इस्राइल को स्वीकार करना चाहिए और उसे इस्राइल से हमेशा के लिए संघर्ष को समाप्त करने को तैयार रहना चाहिए।

गाजा और पश्चिमी तट के इलाकों में लोगों ने संयुक्त राष्ट्र की कार्यवाही का सीधा प्रसारण देखा और जैसे ही मतदात का परिणाम आया सभी खुशी से झूम उठे। उन्होंने पटाखे छोड़ कर, गाडियों के हॉर्न बजाकर, झंडे लहरा कर और अल्लाहो अकबर का नारा लगा कर अपनी खुशी जाहिर की।

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