Image Loading
मंगलवार, 28 फरवरी, 2017 | 15:23 | IST
Mobile Offers Flipkart Mobiles Snapdeal Mobiles Amazon Mobiles Shopclues Mobiles
खोजें
ब्रेकिंग
  • रामजस विवाद में ABVP के खिलाफ प्रदर्शन, क्लिक कर देखें Video
  • देश के पहले हेलीपोर्ट का उत्तरी दिल्ली के रोहिणी में उद्घाटन हुआ।
  • वर्ल्ड कपः भारतीय शूटर जीतू राय ने 10 मीटर एयर पिस्टल इवेंट में जीता ब्रॉन्ज मेडल
  • दिल्ली मेट्रो का स्मार्ट कार्ड 1 अप्रैल से नॉन रिफंडेबल होगा: डीएमआरसी
  • शेयर मार्केटः 50 अंकों की बढ़त के साथ सेंसेक्स 28,862 पर, निफ्टी ने भी लगाई 14 अंकों की...
  • आज के 'हिन्दुस्तान' में पढ़ें हिंदी साहित्यकार विभूति नारायण राय का लेखः यह सूरत...
  • मौसम अलर्टः देहरादून में हल्के बादल छाए रहेंगे, दिल्ली-एनसीआर, लखनऊ, पटना और...
  • अगर घर में रखेंगे ये 4 पौधे तो आप रहेंगे स्वस्थ, पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें।
  • आज का हिन्दुस्तान अखबार पढ़ने के लिए क्लिक करें।

मालदीव के रवैये को उसकी नजर से देखिए

अवधेश कुमार, वरिष्ठ पत्रकार First Published:29-11-2012 10:42:38 PMLast Updated:00-00-0000 12:00:00 AM

मालदीव सरकार ने भारतीय कंपनी जीएमआर के साथ माले के इब्राहीम नसीर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के विकास के लिए किया गया 25 वर्ष का समझौता रद्द कर दिया है। यह घटना गहरी चिंता में डालने वाली है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार, मालदीव को इसका वित्तीय दंड भुगतना पड़ सकता है। जीएमआर अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में क्षतिपूर्ति का मामला दायर करने की बात कह चुकी है। यह परियोजना 51 करोड़, 40 लाख डॉलर की है, जिसमें 70 प्रतिशत कर्ज शामिल है। जाहिर है, कर्ज पर भारी ब्याज चुकाना पड़ता है, अत: न्यायालय में कंपनी अपने निवेश, विस्तार आदि का एक-एक विवरण देगी और मालदीव सरकार के लिए कठिनाइयां पैदा हो जाएंगी। भारत सरकार ने भी इस रवैये को अनुचित कहा है। लेकिन मालदीव सरकार टस से मस होने को तैयार नहीं। उसने एक सप्ताह के अंदर जीएमआर को देश छोड़ने का आदेश दे दिया है। सवाल यह है कि आखिर हमसे सघन रूप से जुड़े इस पड़ोसी देश को हमारी नाराजगी तक की परवाह क्यों नहीं है? यह हमारी विदेश नीति के लिए परीक्षा की घड़ी है।

मालदीव के भूगोल के सामरिक महत्व को देखते हुए उसका हमसे दूर जाना किसी आघात से कम नहीं होगा। इसलिए सरकार की पूरी कोशिश होनी चाहिए कि मालदीव किसी तरह हमसे दूर न जाए। जीएमआर के साथ मालदीव सरकार का तनाव लंबे समय से चल रहा था, उसके खिलाफ रैलियां हो रही थीं, पर पता नहीं क्यों हमारा विदेश मंत्रलय सक्रिय नहीं हुआ। मालदीव सरकार ने जीएमआर पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। वहीद नासिर के नेतृत्व वाली नई सरकार के मंत्री हवाई अड्डे के निजीकरण के बाद धांधली की बात कहते रहे हैं। नई सरकार इससे संबंधित संविदा को अवैध करार दे रही है। उसने कई बातें उठाई हैं। मसलन, हवाई अड्डे से बाहर जाने वाले प्रत्येक यात्री पर 25 डॉलर का विकास शुल्क लगाना गलत है और पार्लियामेंट ने इसकी अनुमति भी नहीं दी थी। इसी तरह, हवाई अड्डे पर अन्य शुल्क मुक्त दुकानों सहित अन्य व्यावसायिक गतिविधियों का भी विरोध होता रहा है।

कहा जा रहा है कि पिछली फरवरी में नई सरकार के सत्ता संभालने के बाद से ही मालदीव में भारत विरोधी भावनाएं विस्तार लेती रही हैं। सवाल यह है कि इतना बड़ा विरोध क्या सिर्फ सरकार बदलने के कारण हुआ? हमें निरपेक्ष होकर इस पर विचार करना चाहिए। हमारे देश की कंपनियों को बाहर काम मिलता है, तो उन्हें वहां संविदा के अनुरूप काम करते रहने की स्थिति भी होनी चाहिए, पर यह आवश्यक नहीं कि किसी कंपनी का हित ही वहां भारतीय हित हो। वहां यदि भारत विरोधी भावना वर्तमान सरकार के अंदर बढ़ी है, तो ऐसा क्यों हुआ? इसका भी विचार हमें करना चाहिए। अन्य पड़ोसियों की तरह मालदीव भी हमसे दूर न जाए, यह हमारा ही दायित्व है।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)

जरूर पढ़ें

 
Hindi News से जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
Web Title:
 
 
|
 
 
अन्य खबरें
 
From around the Web
जरूर पढ़ें
Jharkhand Board Result 2016
क्रिकेट स्कोरबोर्ड