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करियर में तैयार करें दृष्टिकोण

हिन्दुस्तान नई दिशाएं First Published:28-11-2012 01:13:32 PMLast Updated:00-00-0000 12:00:00 AM
करियर में तैयार करें दृष्टिकोण

सभी लक्ष्य सबसे पहले अपने दिमाग में तैयार किए जाते हैं। करियर में एक दृष्टिकोण अपनाने के बाद आप पाएंगे कि लक्ष्य प्राप्ति और संतुष्टि, दोनों आपके पास स्वत: ही चले आते हैं।

जीवन की सभी यात्राएं एक ही वाक्य से शुरू होती हैं, जो है ‘मैं चाहता हूं..’अपने जीवन की यादों के बारे में सोचें कि आपने कितनी बार कहा है ‘मैं चाहता हूं।’ संभवत: आपने कभी चाहा होगा कि आप कॉलेज जाना चाहते हैं और फिर किसी कॉलेज में दाखिला लिया था। शायद आपने कभी चाहा होगा कि आप किसी कंपनी के लिए काम करना चाहते हैं और आज आप वहीं काम कर रहे हैं। शायद आपने कभी कहा होगा ‘मैं चाहता हूं’ किसी टीम का अगुवा बनना, जो इस समय आपकी देखरेख में है। दरअसल, ‘मैं चाहता हूं’ एक बहुत शक्तिसंपन्न वाक्य है। बिना इसकी इच्छा संजोए आगे बढ़ना बहुत कठिन होता है।

आपके करियर के साथ भी कुछ ऐसा ही है। अपने आकांक्षी नतीजे के बारे में दृष्टिकोण न अपनाने से लक्ष्य पूरा नहीं होता। लक्ष्य तब पूरा होता है, जब आपको पता हो कि आपको क्या चाहिए और उस दिशा में कार्य करें। अंत को नजर में रखे बिना भटकना पड़ता है और जब तक आप दिशाहीन भटकेंगे, समय व्यर्थ जाएगा। आपकी हालत शाख से टूटे एक पत्ते की तरह होगी, जिसे हवा अपनी मर्जी से उड़ाए लिए जाएगी।

क्या होता है दृष्टिकोण?
इसकी एक परिभाषा तो यह है कि आप खुद को भविष्य में कहां खड़ा या पहुंचा पाते हैं। यह भावी तस्वीर एक दिन, सप्ताह, महीना, वर्ष या भविष्य में कभी की भी हो सकती है। लक्ष्य के प्रति यही दृष्टि आपको आगे बढ़ने को प्रेरित करती है। दृष्टिकोण एक ऐसी तस्वीर होती है, जिसके आधार पर आप अपने करियर और जीवन की रूपरेखा तय करते हैं।

लक्ष्य प्राप्ति की संतुष्टि आपको कठिन समय में आत्मविश्वास देगी। आपकी सफलता की यह तस्वीर आपको एक अर्थ, शक्ति और रोमांच भी देती है। दरअसल, एक सही दृष्टिकोण आपके जीवन को अर्थ प्रदान करता है।

कैसे तैयार करें दृष्टिकोण?
अपनी आंखें बंद करें और कल्पनाशीलता को खुला छोड़ दें। निर्धारित करें कि आपको असल में क्या चाहिए और आपके लिए क्या जरूरी है। खुद से प्रश्न करें और उनके उत्तर स्वयं अपने पास आने दें।

खुद से पूछें ये प्रश्न

यदि संभव हो तो मेरे करियर में क्या परिवर्तन होना चाहिए?
किस तरह का काम मेरे लिए आदर्श है?
मेरे लिए क्या जिम्मेदारियां ठीक होंगी?
कैसा बॉस/सहकर्मी ठीक होगा?
कार्य का क्या समय ठीक होगा?
किस तरह की कंपनी में मुझे काम करना चाहिए ?
किस शहर में मुझे रहना चाहिए?
मुझे कितना पैसा कमाना चाहिए?
मैं तनाव, कार्यभार और डेडलाइंस को कैसे संभालूंगा ?

इन प्रश्नों पर विचार करने के बाद उनके उत्तर कागज पर लिखें। इन प्रश्नों के सही या गलत उत्तर एक ही बार में नहीं मिलेंगे। मतलब, जो उत्तर आप चाहेंगे, हो सकता है उन्हें कोई अन्य आपके लिए ठीक न समझे, लेकिन आपके भीतर की आवाज आपके लिए हमेशा ठीक रहेगी।

एक बार अपना विजन निर्धारित करने के बाद अब समय होता है उसे हकीकत में बदलने का।

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