Image Loading
मंगलवार, 28 मार्च, 2017 | 21:24 | IST
Mobile Offers Flipkart Mobiles Snapdeal Mobiles Amazon Mobiles Shopclues Mobiles
खोजें
ब्रेकिंग
  • प्राइम टाइम न्यूज़: पढ़े अब तक की 10 बड़ी खबरें
  • धर्म नक्षत्र: पढ़ें आस्था, नवरात्रि, ज्योतिष, वास्तु से जुड़ी 10 बड़ी खबरें
  • अमेरिका के व्हाइट हाउस में संदिग्ध बैग मिलाः मीडिया रिपोर्ट्स
  • फीफा ने लियोनल मैस्सी को मैच अधिकारी का अपमान करने पर अगले चार वर्ल्ड कप...
  • बॉलीवुड मसाला: अरबाज के सवाल पर मलाइका को आया गुस्सा, यहां पढ़ें, बॉलीवुड की 10...
  • बडगाम मुठभेड़: CRPF के 23 और राष्ट्रीय राइफल्स का एक जवान पत्थरबाजी के दौरान हुआ घाय
  • हिन्दुस्तान Jobs: बिहार इंडस्ट्रियल एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी में हो रही हैं...
  • राज्यों की खबरें : पढ़ें, दिनभर की 10 प्रमुख खबरें
  • टॉप 10 न्यूज़: पढ़े देश की अब तक की बड़ी खबरें
  • यूपी: लखनऊ सचिवालय के बापू भवन की पहली मंजिल में लगी आग।
  • पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी को हार्ट में तकलीफ के बाद लखनऊ के अस्पताल...

सफलता की दिशाएं

First Published:16-08-2012 08:03:32 PMLast Updated:00-00-0000 12:00:00 AM

युवा उद्यमियों के लिए चुनौतियां कम नहीं
1947 में हर भारतीय को राजनीतिक स्तर पर वोट देने का समान और स्वतंत्र अधिकार मिला, पर क्या हर किसी को आर्थिक आजादी भी मिली? क्या हर भारतीय समान और स्वतंत्र रूप से अपना उद्यम स्थापित कर सकता है? उत्तर होगा नहीं।

एक नया उद्यम स्थापित करने की प्रक्रिया में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। कुछ स्वाभाविक होती हैं तो कुछ किसी देश और उसकी अंदरूनी प्रशासन व्यवस्था के कारण उत्पन्न होती हैं। भ्रष्टाचार और लाइसेंस संबंधी परेशानियों के चलते अपना उद्यम स्थापित करने में अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यही वजह है कि उद्यम स्थापित करने और उसे शुरू करने में लगने वाले समय आदि मानकों में भारत की गिनती निचले स्तर पर होती है। आजादी के बाद समाजवादी सोच के तहत देश का निर्माण करने और उसकी दशा-दिशा निर्धारण करने की जिम्मेदारी सरकार की थी। लोगों ने सरकार को उद्योग स्थापित और संचालित करने वाले पक्ष के रूप में देखा और खुद को उनमें काम करने वाले कर्मचारी के रूप में। नौकरी-पेशा इस वर्ग ने अपने बच्चों की शिक्षा पर खूब ध्यान दिया, ताकि उन्हें बड़े होकर अच्छी नौकरी मिल सके। छोटे व्यवसाय उनके लिए विकल्प के तौर पर उभरे, जो पढ़ाई में अच्छे नहीं थे। व्यवसायी वर्ग की छवि सिर्फ हानि-लाभ सोचने वाले कम पढ़े-लिखे वर्ग की बनने लगी। सरकारी नीतियों और लाइसेंस राज के कारण व्यवसायी नियम तोड़ने, कर बचाने और नेताओं और अधिकारियों से सांठ-गांठ करने वाला व्यक्ति माना जाने लगा। इस सोच में बड़ा बदलाव 80 के बाद प्रगतिवादी सोच के आने से हुआ। 1991 के उदारीकरण ने टेलिकॉम आदि क्षेत्रों में उद्यमियों को काम करने का मौका दिया। नतीजा हुआ कि जीडीपी तेजी से बढ़ने लगी और आईटी क्रांति ने नारायण मूर्ति जैसे नायकों को जन्म दिया।

उद्यमशीलता के एक नए युग की शुरुआत हुई। आईआईटी और आईआईएम जैसे बड़े संस्थानों में युवा उद्यमियों के लिए इन्क्यूबेटर केंद्र खोले गए। हमारी कंपनी का आधार भी आईआईटी के इसी इन्क्यूबेटर सेंटर से होकर गुजरता है। पर अभी भी काफी कुछ किया जाना बाकी है। उदारीकरण के बावजूद शिक्षा व कृषि क्षेत्र अपेक्षित सुधारों से दूर हैं। बड़े उद्योगपतियों के लिए व्यवसाय शुरू करना आसान है, प्रतिष्ठित संस्थानों के छात्रों का अपने उद्योग के लिए ऋण लेना आसान है, पर छोटे शहरों के युवाओं को अपने विचार के लिए पैसा जुटाना मुश्किल। वर्तमान में ऑनलाइन व तकनीक से जुड़े ऐसे उद्यम ही सामने आ रहे हैं, जिनके लिए कम पूंजी की आवश्यकता होती है। ऐसी स्थिति में अच्छे विचार की भी कोई कीमत नहीं रह जाती। हालांकि यह सच्चाई है कि उद्यमशीलता कई रूपों में फायदा देती है। उद्यम असफल हो जाए तो भी युवाओं की विभिन्न पक्षों पर काम करने की योग्यता बढ़ जाती है। यही वजह है कि कंपनियां भी ऐसे युवाओं को रखना पसंद कर रही हैं।
दिपिंदर शेखों
सह संस्थापक और निदेशक, कृतिकल सॉल्यूशन प्राइवेट लि.

दक्षता आधारित शिक्षा को बढ़ावा देना जरूरी


एक ओर जहां भारतीय शिक्षा में हुए विकास को दर्शाने वाले आंकड़ों की कमी नहीं, वहीं आलोचकों का एक बड़ा वर्ग पाठ्यक्रमों की प्रासंगिकता पर ही सवाल उठा रहा है। इन सबके बीच कंपनियां तलाश रही हैं कुशल और दक्ष उम्मीदवारों को, तो युवाओं को आस है अच्छे अवसरों की। वर्तमान में कंपनियों में साधारण और कम तकनीकी कामों के लिए भी उच्च शिक्षित युवाओं को रखने की चाह बढ़ी है, जिसके कारण छात्र अपनी शैक्षिक और पेशेवर अर्हता को बढ़ाने के लिए महंगे प्रोफेशनल प्रोग्राम्स की ओर रुख कर रहे हैं। युवाओं की बड़ी संख्या ऐसे कायरें में लगी है, जिसके लिए उनकी शैक्षिक योग्यता कहीं अधिक है। यही कारण है कि कम प्रतिष्ठित पर महंगे बी-स्कूलों से एमबीए करने वाले युवाओं को मल्टीप्लेक्स सिनेमा में टिकट बेचते या इंजीनियरिंग छात्रों को कॉल सेंटरों में सामान्य नौकरी करते देखा जा सकता है। एमबीए और पीएचडी कर चुके उम्मीदवार सरकारी स्तर पर सामान्य क्लैरिकल नौकरियों के लिए आवेदन कर रहे हैं। मेरी नजर में युवाओं में शिक्षा का स्तर और रोजगार बाजार में उनकी मांग को बढ़ाने के लिए सरकार को युवाओं की समग्र क्षमता के विकास पर जोर देना होगा। कंपनियों को अपना ध्यान मात्र डिग्रियों पर केन्द्रित न करके उम्मीदवारों की क्षमताओं पर करना होगा। हाल ही में टोयोटा कंपनी ने ब्यूटी पार्लर चलाने वाली एक महिला को अमेरिका के अपने प्लांट का प्रमुख बनाया था।

ऐसे कदमों का सबसे बड़ा फायदा यह है कि पिछले कुछ सालों में जिस तरह पाठ्यक्रमों को ‘ओवर ग्लैमराइज्ड’ बना कर पेश किया जा रहा है, उसे कम करने में मदद मिलेगी। युवाओं पर दबाव कम होगा और रचनात्मक सोच बढ़ेगी। शैक्षिक संस्थानों को भी अधिक प्लेसमेंट रिकॉर्ड और ऊंचे वेतन पैकेजों के रूप में खुद को ब्रांड बनाने की मानसिकता से बाहर निकलना होगा। शिक्षा केवल दैनिक जरूरतों को पूरा करने का जरिया भर नहीं है, उससे व्यक्ति की संभावनाओं, रुचियों और अभिव्यक्ति के स्तरों का भी विकास होना चाहिए।

अंत में छात्रों को एक बड़ी जिम्मेदारी का वहन करना होगा। पढ़ाई करते समय और किसी कोर्स का चुनाव करते वक्त उनका ध्यान अल्पकालिक लक्ष्यों की ओर न होकर दीर्घकालिक लक्ष्यों और भविष्य पर होना चाहिए। सूचनाएं एकत्रित करने से अधिक उनका ध्यान अपनी क्षमता और समर्थता में विकास करने पर होना चाहिए, जिसके लिए प्रयास उन्हें भी करने होंगे। हाल में उन प्रोफेशनल प्रोग्राम्स की कॉरपोरेट्स के बीच मांग बढ़ी है, जो सीधे तौर पर स्किल्स के विकास से जुड़े हैं। शिक्षा व्यवस्था को जरूरतों के मुताबिक तैयार करने के लिए ‘एप्रेंटिसशिप व पेड इंटर्नशिप’ आधारित शैक्षिक प्रोग्राम्स को बढ़ावा देना होगा।
राकेश जैन
एचआर व लीडरशिप कंसल्टेंट

काम जानते हैं तो मौकों की कमी नहीं


आजादी के बाद के दशकों में सबसे ज्यादा मांग में सरकारी नौकरियां थीं। क्लर्क की नौकरी मिल जाना भी उस समय खासा महत्व रखता था। रेलवे, विभिन्न सरकारी विभाग, बिजली विभाग, जल बोर्ड, शिक्षण और बैंकिंग से लेकर कोई भी ऐसी नौकरी, जिसके साथ सरकारी शब्द जुड़ा हो, मांग में थी। सरकारी नौकरियों के बाद टाटा और बिड़ला के साथ जुड़ना 60 और 70 के दशक में किसी सम्मान से कम की बात नहीं थी।

90 के दशक में उदारीकरण का दौर शुरू हुआ और मल्टीनेशनल कंपनियां युवाओं का ध्यान आकर्षित करने लगीं। कुशल और उच्च शिक्षित युवा खुद को एक शहर या देश तक सीमित रखने की जगह पूरी दुनिया में विस्तार की संभावनाएं तलाशने लगे।

देश के प्रमुख शिक्षण संस्थानों का दौरा करें तो युवाओं की एक बड़ी संख्या किसी बड़ी कंपनी में काम करने की जगह, खुद अपनी कंपनी खोलने यानी स्वरोजगार की राह पर चलने को आतुर दिखती है। वो शुरुआत शून्य से करके अपने बलबूते साख बनाना चाहते हैं। इसके बावजूद रीयल इस्टेट, आईटी, बीपीओ, एफएमसीजी, मीडिया, रिटेल, बैंकिंग, शिक्षा, इंटरनेट, यात्रा व पर्यटन, प्रोसेस्ड फूड और कृषि जैसे क्षेत्र आज भी तेजी से अपने पैर पसार रहे हैं और भविष्य में भी लोगों को यहां नौकरी के अवसर बड़ी संख्या में मिलेंगे। कोर्स के मामले में बिक्री एवं विपणन, रिटेल मैनेजमेंट, आईटी, बिजनेस एनालिस्ट, होटल मैनेजमेंट आदि अभी भी युवाओं के बीच मांग में हैं। भविष्य में भी इन क्षेत्रों में पढ़ाई करने वालों में नौकरियों के अवसर बने रहेंगे। जाहिर है, युवाओं में खुद को इन क्षेत्रों की जरूरत के अनुरूप तैयार करना और आवश्यक स्किल्स के विकास पर जोर देना होगा। बैंकिंग, शिक्षा और विनिर्माण जैसे क्षेत्र में सरकारी नौकरी के अवसरों की भी कमी नहीं है और आगे भी नहीं होगी।

12 वें एंटल ग्लोबल स्नैपशॉट के सर्वे के मुताबिक पूरी दुनिया में पिछली तिमाही में जहां लोगों को नौकरी पर रखने के प्रतिशत में कमी आई है, वहीं भारतीय जॉब मार्केट में स्थिति इसके उलट है। भारतीय जॉब मार्केट में लोगों को नौकरी पर रखने और नौकरी से निकालने का प्रतिशत कमोबेश एक ही जैसा रहा। पिछली तिमाही में 55% भारतीय कंपनियों ने लोगों को नौकरी पर रखा, वहीं 56% कंपनियां निकट भविष्य में ऐसा करने वाली हैं। सर्वे से यह संकेत भी मिलता है कि सुविधा व लग्जरी के सामान, बीपीओ, सुरक्षा सेवा, फैशन और कृषि में सबसे ज्यादा संख्या में लोगों को नौकरियां मिल रही हैं। युवा सैलरी पैकेज व सुरक्षित भविष्य के अलावा करियर का चुनाव करते समय अपनी रुचियों को भी तरजीह दे रहे हैं। वह क्षेत्र निकट भविष्य में मांग में है या नहीं, पर आपकी रुचि और दक्षता उस क्षेत्र में आपको काम करने और बढ़ने के मौके दे ही देगी।
जितिन चावला
करियर काउंसलर

जरूर पढ़ें

 
Hindi News से जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
Web Title:
 
 
|
 
 
अन्य खबरें
 
From around the Web
जरूर पढ़ें
क्रिकेट स्कोरबोर्ड