Image Loading
गुरुवार, 08 दिसम्बर, 2016 | 05:39 | IST
Mobile Offers Flipkart Mobiles Snapdeal Mobiles Amazon Mobiles Shopclues Mobiles
खोजें
ब्रेकिंग
  • सरकार द्वारा जनधन बैंक खातों के दुरुपयोग के प्रति आगाह किए जाने के बाद ऐसे खातों...
  • रतन टाटा ने कहा कि टाटा संस ने साइरस मिस्त्री को हटाने का फैसला इसलिए किया...
  • पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस का विमान एबटाबाद के पास क्रैश, 47 यात्री थे सवार:...
  • RBI ने नहीं किया रेपो रेट में कोई बदलाव, विकास दर का अनुमान 7.6 से घटा कर 7.1 किया
  • संसद न चलने से आडवाणी दुखी, बोले- न सरकार, न विपक्ष चलाना चाहता है सदन (टीवी...
  • अगले तीन दिनों में दिल्ली की हवा होगी और प्रदूषित, हिन्दुस्तान का आज का ई-पेपर...
  • सुप्रीम कोर्ट राकेश अस्थाना की सीबीआई के अंतरिम निदेशक के रूप में नियुक्ति को...
  • नोटबंदी पर संसद में हंगामा, गुलाम नबी आजाद ने पूछा- 84 लोगों की मौत का जिम्मेदार...
  • श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से दूरसंवेदी उपग्रह रिसोर्ससैट-2ए का...
  • 'अम्मा' के निधन पर कमल हासन के विवादित TWEET पर लोगों ने निकाला गुस्सा, बॉलीवुड की टॉप...
  • हिन्दुस्तान टाइम्स के प्रधान संपादक बॉबी घोष का ब्लॉग 'आम लोगों की राय का मिथक'...
  • मौसम अलर्ट: दिल्ली, पटना, लखनऊ में धुंध रहेगी, रांची और देहरादून हल्की धूप निकलने...
  • मशहूर अभिनेता दिलीप कुमार की तबीयत खराब, मुंबई के लीलावती अस्पताल में भर्ती
  • हेल्थ टिप्स: रोज दही खाने से पेट रहता सही, बालों और स्किन को भी होते हैं ये फायदे
  • कोहरे की मार: 81 ट्रेनें लेट, 21 ट्रेनों के समय में बदलाव और तीन ट्रेनें रद्द।
  • भविष्यफल: मीन राशिवालों की कुछ पुराने दोस्तों से हो सकती है मुलाकात। अन्य...
  • GOOD MORNING:राजकीय सम्मान के साथ जयललिता के पार्थिव शरीर को दफनाया गया। अन्य बड़ी...

तालिबान का मसला

First Published:15-05-2012 10:21:04 PMLast Updated:00-00-0000 12:00:00 AM

अफगानिस्तान के साथ हमारे रिश्ते कई स्तरों पर हैं। इसलिए भी हमारी विदेश नीति के एजेंडे पर अमेरिकी हावी रहते हैं। दरअसल, पूरे अफगान मामले में कई ‘खिलाड़ी’ एक साथ शामिल हैं। इनकी राहें जुदा-जुदा हैं, पर चाल लगभग एक समान। गुजरे इतवार को ‘ट्री-पार्टी कमीशन’ की 35वीं बैठक हुई। इसमें अफगानिस्तान में नाटो फौज के कमांडर और पाकिस्तान व हिन्दुस्तान के आर्मी चीफ शामिल हुए। इस बार सरहद पर अमन-चैन को पुख्ता करने पर जोर डाला गया। साथ ही सलाला जैसी घटनाएं आईंदा न घटें, इसे लेकर एक व्यवस्था बनाने पर सहमति बनी। दोनों तरफ के नुमाइंदे इस बात को जानते-समझते हैं कि सरहदी इलाकों में आपसी तालमेल की सख्त जरूरत है, क्योंकि इन इलाकों में अक्सर जंग जैसा माहौल बना रहता है, जिससे दोनों ही तरफ गलतफहमियां पैदा होती हैं। बहरहाल, यह गुफ्तगू फौज-से-फौज की रही। वैसे, यह गुफ्तगू इस लिहाज से बिल्कुल अलग कही जा सकती है कि इसके कामकाज का तरीका कूटनीतिक नहीं, बल्कि उससे काफी अलग था। उसमें तो मैदान-ए-जंग की हकीकत पर तब बहस होती है, जब कोई गलती कर बैठता है। जैसे, पिछले साल नवंबर महीने में अमेरिकी फौज से गलती हुई थी। यही नहीं, कूटनीतिक नक्शे पर बहुत कुछ साफ-साफ नहीं दिखता। पल भर में जंग जैसा माहौल बन जाता है। सीनेटर डी. फेनस्टेन के बयानों से तो कम से कम यही लगता है। उन्होंने इतवार को कहा कि पाकिस्तान तालिबान के खात्मे के लिए जो कर रहा है, वह न केवल नाकाफी है, बल्कि ऐसा लगता है कि वह तालिबान के लिए ‘पनाहगाह’ बन गया है। फेनस्टेन के मुताबिक, अफगानिस्तान की एक-तिहाई जमीन पर तालिबान का कब्जा है। शायद इसमें हकीकत हो। लेकिन वह यह भी कहती हैं कि तालिबान को फौज के जरिये हराया जा सकता है। यह मुमकिन नहीं लगता। उन्होंने कहा कि ‘दोनों मुल्कों में तालिबान के खात्मे की चाबी’ पाकिस्तान के पास है। जाहिर है, वह सही कह रही हैं। लेकिन जब वह कहती हैं कि ‘महफूज पनाहगाह को खत्म’ करने के लिए पाकिस्तान कुछ नहीं कर रहा है, तो यह एक सरासर झूठ है।
द न्यूज, पाकिस्तान

जरूर पढ़ें

 
Hindi News से जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
Web Title:
 
 
 
अन्य खबरें
 
From around the Web
जरूर पढ़ें
Rupees
क्रिकेट स्कोरबोर्ड