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गुस्सा देखो, ये आया कहां से

मृदुला भारद्वाज First Published:11-04-2012 12:23:46 PMLast Updated:00-00-0000 12:00:00 AM
गुस्सा देखो, ये आया कहां से

दिल्ली पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2011 में 543 हत्याएं हुईं। इनकी बड़ी वजह बना राजधानी वालों का गुस्सा। पुलिस के अनुसार, अब लोगों का गुस्सा बहुत ज्यादा खतरनाक साबित हो रहा है। पिछले साल हुई हत्याओं में 17 फीसदी हत्याएं गुस्से के कारण हुईं। इनमें पार्किंग विवाद से लेकर आवारा कुत्तों को लेकर हुए मामूली झगड़े भी शामिल हैं। 13 फीसदी हत्याओं के पीछे आपराधिक उद्देश्य थे। इस गुस्से को कैसे नियंत्रित रखें, बता रही हैं मृदुला भारद्वाज

आज हम इतने अधिक व्यस्त हो गए हैं कि न अपने परिवार को समय दे पा रहे हैं और न ही खुद को। ऐसी भागदौड़ भरी जिंदगी में हम नित नए तनाव से घिरे रहते हैं, जो गुस्से का बड़ा कारण बनता जा रहा है।  इससे हमारी सेहत तो खराब होती है और हम अनेक बीमारियों की अपनी चपेट में आते हैं। विज्ञान कहता है कि जब किसी व्यक्ति को गुस्सा आता है तो उसके शरीर में एड्रेनेलिन रसायन बनता है, जो शरीर में कम से कम 18 घंटे तक बना रहता है। इस दौरान हमारी सोच भी कमजोर हो जाती है। तभी तो कहते हैं कि गुस्से में सोचने-समझने की शक्ति कम हो जाती है। गुस्सा न केवल हमारे मन को, बल्कि शरीर को भी नुकसान पहुंचाता है। शोध कहते हैं कि गुस्सैल स्वभाव वाले व्यक्ति को हार्ट अटैक की आशंका तीन गुना बढ़ जाती है। यह आशंका 55 साल के बाद 6 गुना अधिक हो जाती है।

गुस्से के नुकसान
गुस्सा हमारी निर्णय क्षमता को न केवल कमजोर करता है, बल्कि इसके लगातार रहने से यह क्षमता समाप्त भी हो सकती है।
गुस्से से कार्यक्षमता प्रभावित होती है और करियर व रिश्तों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
जो लोग अपने गुस्से को प्रकट नहीं कर पाते और मन में ही रख लेते हैं, वे ज्यादा चिड़चिड़े हो जाते हैं। उन्हें शारीरिक और मानसिक बीमारियां होने की आशंका काफी बढ़ जाती है।

क्या है ये गुस्सा?
क्रोध एक भावनात्मक अवस्था है, जिसमें खीझ, तेज गुस्सा या भयंकर क्रोध शामिल हैं। जब आप नाराज होते हैं तो आपके दिल की धड़कनें और रक्तचाप दोनों बढ़ जाते हैं। इसमें आपके एनर्जी हार्मोस एड्रेनेलिन और नोराडेनिलिन का स्तर भी बदल जाता है। इसका कारण आंतरिक भी हो सकता है और बाह्य भी। यह गुस्सा दूसरे पर भी निकल सकता है और खुद पर भी।

पा सकते हैं काबू
गुस्से के इलाज के लिए कुछ फिजियोलॉजिकल टेस्ट होते हैं। इन टेस्ट से गुस्से की तीव्रता को मापा जा सकता है। इस जांच से पता चलता है कि आप गुस्से के प्रति कितने संवेदनशील हैं और इस पर कैसे काबू पाते हैं। अगर आपका गुस्सा आपे से बाहर है तो आपको मनोवैज्ञानिक की मदद लेनी चाहिए। वह आपको इस पर काबू पाने के तरीके बता सकते हैं। मनोवैज्ञानिक गुस्से की स्थिति और सीमा का पता लगा कर आपकी सहायता करते हैं।

गुस्सा अनुवांशिक भी हो सकता है
कुछ लोगों को गुस्सा ज्यादा आता है। आमतौर पर ऐसे गुस्से का एक बड़ा कारण अनुवांशिक या फिर शारीरिक संरचना भी हो सकती है। बहुत सारे बच्चे ऐसे होते हैं, जो जन्म से ही चिड़चिड़े होते हैं। शोधों से पता चला है कि पारिवारिक पृष्ठभूमि भी गुस्से वाला स्वभाव बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है। ऐसे लोग बड़ी जल्दी क्रोधित हो जाते हैं, जिनके परिवार के लोग अवरूद्घ मानसिकता, परिस्थितियों को उलझाने वाले और भावनात्मक संवाद में कमजोर होते हैं।

कैसे पाएं गुस्से पर नियंत्रण
जब भी आपको गुस्सा आए तो खुद को किसी अन्य काम में व्यस्त कर लें।
गुस्सा आए तो तुरंत उस पर प्रतिक्रिया न दें। थोड़ी देर बात अपनी भावनाएं व्यक्त करें।
गुस्सा आने पर ठंडा पानी पिएं।
गुस्से में मेडीटेशन या ध्यान लगाएं। इससे आपका ध्यान बंट जाएगा।
घर में हों तो बच्चों के साथ खूब मस्ती करें। ये क्रिया आपको एनर्जी देगी और मन खुश रहेगा।
सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक कभी भी 15 मिनट का समय निकाल कर गहरी-गहरी सांस लें। इससे आपके फेफड़ों और शरीर को ऊर्जा मिलती है।
उलझनों और परेशानियों के बारे में जितना सोचते हैं, वे आपको उतना ही परेशान करती हैं। इससे आप दिमागी रूप से कमजोर भी होते हैं। इस लिए खुश रहें और दूसरों को भी खुश रखें।
गुस्से को शांत करने का सबसे आसान तरीका है अपनी मांसपेशियों को रिलैक्स करना। सिर्फ मुट्ठी को खोलने और जबड़े को रिलैक्स करने से आप शांत हो सकते हैं। गहरी सांस लेने से एंग्जायटी आपके शरीर से बाहर चली जाएगी।
कभी ट्रैफिक जाम की वजह से आपको गुस्सा आए तो अपनी कार में रखे हास्य व मनोरंजन से भरे टेप सुनें, ताकि आपका ध्यान बंट जाए। अगर यह उपाय काम न करे तो एक तरफ हो जाएं और खुद से बातें करें। जब तक गुस्से पर काबू न पा लें, तब तक ड्राइविंग न करें।
खुद से सकारात्मक बातें करें और उसे दुहराएं, जैसे- मुझे अच्छा महसूस हो रहा है या सब कुछ कंट्रोल में है।
अच्छी खुशबू से भी तनाव गायब हो जाता है। इसलिए खुशबूदार तेलों का प्रयोग करें। शुद्घ लेवेंडर का तेल टिश्यू पेपर पर डाल कर उसे अपनी जेब या पर्स में रख लें या किसी ऐसी जगह रखें, जहां आसानी से निकाल कर सूंघा जा सके।
एक से 100 तक गिनती गिनें। फिर 10 बार गहरी सांस लें।
विशेषज्ञों का मानना है कि शरीर से गुस्सा यानी एड्रेनेलिन रसायन निकालने का सबसे अच्छा तरीका है कसरत, इसलिए इसके लिए समय जरूर निकालें। तेज चहलकदमी, तैराकी, जिम या बहुत अधिक न थकाने वाले वर्कआउट का सहारा लें।
गुस्सा आने पर कहीं घूमने चले जाएं या तेज चाल से चलें।
मुंह पर ठंडे पानी के छींटे मारें।
संगीत के जरिये अपना ध्यान बांटे। जिस बात पर गुस्सा आता हो, उसे अपनी बातचीत में शामिल न करें।
क्रोध आने पर अपने विचारों को किसी दूसरी तरफ मोड़ दें।
मजाक और हल्के-फुल्के मजेदार वाक्य गुस्से को ठंडा करने में कई तरह से सहायक होते हैं, जैसे कि आप नाराज हैं तो ऐसे में उस व्यक्ति के बारे में कोई मजेदार कल्पना करें, जिससे आपको हंसी आए।
अपनी नींद जरूर पूरी करें, क्योंकि कई बार नींद पूरी न होने पर भी चिड़चिड़ापन होता है। इससे तनाव या गुस्सा बढ़ना स्वाभाविक है।
गुस्सा आने पर बहुत अधिक न खाएं, बल्कि काम से कुछ देर का आराम लेकर गपशप करें या फिर कोई गेम आदि खेल लें।

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