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हार के कारण

First Published:14-03-2012 10:20:04 PMLast Updated:00-00-0000 12:00:00 AM

उत्तर प्रदेश के चुनाव में पार्टी के निराशाजनक प्रदर्शन पर टिप्पणी करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने हार के कारणों में संगठन की कमजोरी और गलत उम्मीदवारों के चयन को गिनाया। एक परिपक्व राजनेता की तरह हार का ठीकरा उन्होंने अन्य लोगों के सिर नहीं फोड़ा, किसी और को उत्तरदायी नहीं बताया। दूसरी ओर, अपनी करारी हार का जिम्मेदार दूसरों को ठहराते हुए बसपा सुप्रीमो ने विष वमन किया। उन्होंने हार के चार कारण गिनाए। अपनी पार्टी की पराजय का ठीकरा उन्होंने मुसलमानों, कांग्रेस, भाजपा और मीडिया के सिर पर फोड़ दिया। अपने कार्यकाल में व्याप्त भ्रष्टाचार व कुप्रशासन पर मायावती ने एक शब्द भी नहीं कहा। अब तक लोग ईश्वर को ही अंतर्यामी कहते थे, परंतु लगता है कि अपनी हार के बाद मायावती को कोई दिव्यदृष्टि मिल गई है, तभी तो उन्होंने समाजवादी पार्टी की जीत से उच्च वर्ग के लोगों को दुखी बताया। दूसरों के मन की बात बिना कहे ही जान लेना, एक चमत्कार ही तो कहलाएगा।
जसवंत सिंह, शांतिकुंज, नई दिल्ली

समय व ईंधन की बर्बादी
राजधानी में डॉक्टर राममनोहर लोहिया अस्पताल के पास के गोल चक्कर को दिल्ली पुलिस ने बंद कर रखा है, जबकि एयर पोर्ट मेट्रो का काम महीनों पहले पूरा हो चुका है। गोल चक्कर को बंद किए जाने से अस्पताल जाने वालों को एक बस स्टॉप दूर से पैदल जाना पड़ता है। इतना ही नहीं, इस अवरोध के कारण हर दिन हजारों वाहनों को लंबा चक्कर लगाना पड़ता है। इससे समय तथा ईंधन की बर्बादी होती है। दिल्ली की ट्रैफिक पुलिस को तत्काल इस समस्या पर ध्यान देना चाहिए।
वीणा, 3/18, राजेंद्र नगर, नई दिल्ली

तकलीफदेह सीटें
इसमें कोई शक नहीं कि इस समय हरियाणा रोडवेज की बसों का स्वरूप बेहद आकर्षक है, मगर बसों के अंदर जिस तरह से सीटें लगाई गई हैं, वे यात्रियों के लिए बेहद तकलीफदेह हैं। एक तो आगे-पीछे की सीटों के बीच में इतनी कम जगह है कि यात्रियों के घुटने आगे की सीट से सटे बिना नहीं रहते। फिर आगे की सीट की पीठ को ऊपर से पीछे की ओर झुकाया गया है, इससे स्थिति और गंभीर हो जाती है। इन तंग सीटों पर यात्री बैठ ही मुश्किल से पाता है, ऐसे में सामान को वह कहां रखे। दुर्घटना होने की स्थिति में इन तंग सीटों पर बैठे यात्रियों को ज्यादा चोट लगने की आशंका हो जाती है। अतएव यह सुनिश्चित किया जाना परम आवश्यक हो जाता है कि बसों में यात्री न केवल आराम से बैठ सके, बल्कि आपात स्थिति में उसके बचाव की भी पूरी व्यवस्था हो। उम्मीद है, हरियाणा के मुख्यमंत्री व परिवहन मंत्री इस तरफ तत्काल ध्यान देंगे।
अक्षित तिलक राज गुप्ता, रादौर, हरियाणा

शिवराज के राज में
मध्य प्रदेश में जिन हालात में ऐन होली के दिन एक बहादुर आईपीएस अधिकारी की हत्या हुई, उससे राज्य की कानून-व्यवस्था तो कठघरे में खड़ी हो ही गई है, शिवराज सिंह के सुशासन की भी पोल खुल गई है। विपक्ष के आरोपों को अतिरंजित मान भी लें, तब भी यह हकीकत बदल नहीं जाएगी कि राज्य में अपराधियों का मनोबल चरम पर है। इसके बाद भी राज्य सरकार के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने मरहूम आईपीएस की पत्नी के बारे में जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया, वह न सिर्फ शर्मनाक है, बल्कि भारतीय संस्कृति का अपमान करती है। उम्मीद है, भाजपा आलाकमान इसका संज्ञान लेगा।
मेघना सिंह, गुरु रामदास नगर, दिल्ली-92

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