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हिन्दू ने एक दशक तक किया जामा मस्जिद का प्रबंधन

अयोध्या के राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद के फैसले पर जहां पूरे देश की निगाह लगी है, वहीं बुढ़ाना की जामा मस्जिद सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल पेश करती है। इस ऐतिहासिक मस्जिद का प्रबंधन एक दशक तक हिन्दू ने किया है। इस मस्जिद में हिन्दुओं और मुसलमानों ने अरबी और फारसी की शिक्षा भी एकसाथ प्राप्त की है।


बुढ़ाना कस्बा हिन्दू-मुस्लिम एकता की एक मिसाल है। एक दूसरे के त्योहारों, सुख-दुख में शरीक होने का सिलसिला यहां परंपरा के तौर पर आगे बढ़ रहा है। इतना ही नहीं यहां की ऐतिहासिक जामा मस्जिद के प्रबंधन का निर्वहन एक दशक तक हकीम श्रीकृष्ण शर्मा ने किया। इस मस्जिद का निर्माण 323 वर्ष पूर्व मुगल शासक औरंगजेब के शासन में कराया गया था। यह मस्जिद उस समय अरबी और फारसी शिक्षा का मुख्य केंद्र थी। मस्जिद के रिकॉर्ड के अनुसार इसमें हाफिज अब्दुल्ला उस्मानी दोनों संप्रदाय के लोगों को शिक्षा देते थे। यहां राव दीवान सिंह के वंशज नंबरदार अतर सिंह त्यागी ने भी शिक्षा प्राप्त की थी। वर्ष 1920 में अंग्रेजों के विरुद्ध चला खिलाफत तहरीक का दफ्तर भी जामा मस्जिद में स्थापित किया गया था। 
बताया गया है कि एक बार अंग्रेजी शासनकाल में गोकशी को लेकर विवाद पैदा हो गया था। अंग्रेज कलेक्टर ने दोनों संप्रदायों के लोगों को बुलाकर हकीकत जानकर फैसला करना चाहा, तो हिन्दू संप्रदाय के लोगों ने उनका फैसला रोककर हाफिज अब्दुल समी के ऊपर मामला छोड़ दिया। इस पर हाफिज अब्दुल ने कलेक्टर को लिखित में दिया कि यहां कभी गोकशी नहीं हुई, न आगे होगी। मैं चाहता हूं कि दो भाइयों के दिलों में दरार पैदा करने वाला यह कार्य नहीं होना चाहिए। उस समय ही दोनों संप्रदाय के लोगों में तय हुआ था कि श्री हरनंदेश्वर धाम मंदिर के निकट नदी में कोई मछली का शिकार नहीं करेगा। इस परंपरा पर अभी तक अमल किया जा रहा है। बुढ़ाना के हिन्दू-मुस्लिम प्रेम की मिसाल आसपास के कस्बों में भी दी जाती रही है। आपसी मतभेद यहां आपस में बैठकर सुलझाये जाते हैं।

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