Image Loading
रविवार, 29 मई, 2016 | 18:58 | IST
 |  Image Loading
ब्रेकिंग
  • किरण बेदी ने उपराज्यपाल की शपथ ली, पुडुचेरी के उपराज्यपाल पद की शपथ ली: टीवी...
  • गुड़गांव के मानेसर प्लांट में आग लगी, करोड़ों रुपये का सामान जला: टीवी रिपोर्ट्स
  • भाजपा ने वेंकैया नायडू, बीरेंद्र सिंह, निर्मला सीतारमण, मुख्तार अब्बास नकवी और...
  • कर्नाटक के दावणगेरे में पीएम मोदी की रैली, पीएम मोदी ने कहा, देश को गलत दिशा में...
  • मथुरा जंक्शन पर ट्रेन में बम रखे होने की आगरा से मिली झूठी सूचना , आधा दर्जन...
  • विदेशियों पर हमले पर बोले विदेश राज्यमंत्री वीके सिंह, पुलिस से मामले की...
  • BSEB 10th result : टॉप 10 में 42 बच्चे हैं। सभी जमुई के सिमुलतला आवासीय विद्यालय के हैं। पूरी...
  • BSEB 10th result : सीबीएसई की तर्ज पर बिहार बोर्ड भी करेगा कंपार्टमेंट एग्जाम। चेक करें...
  • BSEB 10th result : 10.86% छात्र ही प्रथम श्रेणी में पास हो सके। Click कर देखें रिजल्ट
  • BSEB 10th result : 54.44% लड़के पास हुए जबकि मात्र 37.61% लड़कियां ही पास हो सकीं। Click कर देखें रिजल्ट
  • हिन्दुस्तान ब्रेकिंगः BSEB 10th result : मैट्रिक का रिजल्ट 50% भी नहीं, Click कर देखें रिजल्ट

ग्रह निर्माण की धारणाओं के सामने नई चुनौती

सेंटियागो, एजेंसी First Published:01-12-2012 03:24:54 PMLast Updated:00-00-0000 12:00:00 AM
ग्रह निर्माण की धारणाओं के सामने नई चुनौती

अंतरिक्ष वैज्ञानिकों को एक ऐसी नई जानकारी मिली है, जो पृथ्वी जैसे चट्टानी ग्रहों के निर्माण से जुड़े पारंपरिक सिद्धांतों के सामने चुनौती पेश करती है।
   
हमारे सौरमंडल में पथ्वी के अलावा बुध, शुक्र और मंगल तीन अन्य चट्टानी ग्रह हैं। इनकी सतह ठोस है और यहां भारी धातुओं की मौजूदगी है। ये ग्रह बहस्पति और शनि जैसे गैस के बड़े और घूमते पिंडों से काफी अलग है।
   
यह अध्ययन एस्ट्रोफिजीकल जर्नल ऑफ लैटर्स में कल प्रकाशित किया गया। अंतरिक्ष विज्ञानियों ने उत्तरी चिली के सुदूरवर्ती रेगिस्तान में पर्वत की चोटी पर पांच हजार मीटर की उंचाई पर एल्मा नामक एक दूरबीन का इस्तेमाल किया था।
   
उन्होंने अंतरिक्ष में आईएसओ-ओपीएच 102 नामक ब्राउन डवार्फ की खोज की। ब्राउन डवार्फ एक ऐसा चीज है जो है तो तारे जैसा लेकिन वह बहुत छोटा है कि ज्यादा तेजी से चमक नहीं पाता।
   
पारंपरिक सिद्धातों के अनुसार चट्टानी ग्रहों का निर्माण एक तारे के चारों ओर पदार्थ के घेरे में सूक्ष्म कणों के अनियमित टकराव के कारण होता है। काजल सरीखे ये कण एक दूसरे से चिपक कर विकसित होते हैं।
  
वैज्ञानिकों ने सोचा था कि ब्राउन डवार्फ की बाहरी सीमाएं कुछ भिन्न थीं। उनका मानना था कि चूंकि चारों ओर की डिस्क बहुत पतली हैं इसलिए कण आपस में जुड़े हुए रह ही नहीं सकते। साथ ही, टक्कर होने के बाद कण बहुत तेजी से एक दूसरे से चिपकने के लिए भागते हैं।
  
लेकिन आईएसओ-ओपीएच 102 के चारों ओर की डिस्क में वैज्ञानिकों ने ऐसी चीजें खोज निकालीं जो उनके लिए बड़े -मिलीमीटर के कण थे।
  
अमेरिका, यूरोप और चिली आधारित अंतरिक्ष विज्ञानियों के समूह का नेतृत्व करने वाले कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के लुका रिक्की ने कहा कि इस आकार के ठोस कण ब्राउन डवार्फ के चारों ओर की डिस्क के ठंडे क्षेत्र में निर्माण के लायक नहीं होने चाहिए लेकिन अब लगता कि वे इसके लायक हैं।
  
हम पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं कि एक पूरा चट्टानी ग्रह ही वहां बन सकता हो या फिर बन चुका हो। हम इसके शुरूआती चरण देख रहे हैं। इसलिए हम ठोस के विकसित होने के लिए जरूरी स्थितियों के बारे में अपनी धारणाओं को बदलने जा रहे हैं।

 
 
 
 
 
अन्य खबरें
 
देखिये जरूर
जरूर पढ़ें
Bihar Board Result 2016
Assembely Election Result 2016
क्रिकेट स्कोरबोर्ड
क्रिकेट
IPL-9: तो इसलिए चैंपियन बन सकती हैं IPL-9: तो इसलिए चैंपियन बन सकती हैं 'विराट' की RCB
59 मैच और दो महीने तक चले टी-20 क्रिकेट के बाद आखिरकार आईपीएल की 9वें सीजन के फाइनल मैच का समय आ गया है। फाइनल रॉयल चैलेंजर्स बेंगलोर और सनराइजर्स हैदराबाद के बीच बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम में खेला जाएगा।