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रविशंकर ने पश्चिम में जगाई भारत के प्रति रुचि

वॉशिंगटन, एजेंसी First Published:13-12-2012 11:07:29 AMLast Updated:00-00-0000 12:00:00 AM
रविशंकर ने पश्चिम में जगाई भारत के प्रति रुचि

मशहूर सितार वादक पंडित रविशंकर ने अपने संगीत के जरिए पश्चिमी देशों में भारत के प्रति एक खास रुचि पैदा की थी। अमेरिका के एक जाने-माने थिंक टैंक ने रविशंकर के निधन पर शोक संदेश जारी करते हुए उनके इस योगदान की सराहना की।

रविशंकर ने कैलीफोर्निया के एक अस्पताल में बुधवार को अंतिम सांस ली थी। 'एशिया सोसाइटी फॉर ग्लोबल परफॉर्मिंग आटर्स एंड स्पेशल कल्चरल इनिशिएटिव्स' के निदेशक राशेल कूपर ने कहा कि उन्होंने (रविशंकर) पश्चिम में भारत के प्रति एक महान सभ्यता के केंद्र के रूप में रुचि पैदा की थी। उन्होंने भारत की इस छवि को जटिल और परिष्कृत संगीत के प्रति गहरे सम्मान के साथ नए ढंग से पेश किया। उन्होंने इस संगीत को उन श्रोताओं तक भी पहुंचाया, जिन्हें इसका कुछ खास ज्ञान नहीं था।

उन्होंने कहा कि यह कहना कोई अतिशयोक्ति नहीं होगा कि वैश्विक संस्कृति पर रविशंकर की एक महत्वपूर्ण छाप थी। वह भारतीय शास्त्रीय परंपरा और उसकी वास्तविक आवाज की समग्रता के संरक्षण के मामले में काफी प्रखर थे।

कूपर ने कहा कि संगीत के बारे में उनकी (रविशंकर) गहरी समझ ने उन्हें सांस्कृतिक संगीतमई आदान-प्रदान और आपसी सहयोग की संभावनाओं से विमुख नहीं रखा। पश्चिम के बारे में उनकी समझ ने उनमें पश्चिम के साथ भारतीय संगीत के आदान-प्रदान की एक इच्छा और कर्तव्य की भावना जगाई। फिर संगीत की साझेदारी, चाहे वह शास्त्रीय संगीतकार येहूदी मेनुहिन के साथ हो या जॉर्ज हैरीसन और बीटल्स जैसे रॉक संगीतकारों के साथ।

पिछले कई सालों से बीमार चल रहे रविशंकर की पिछले गुरुवार को कैलीफोर्निया के ला जोला स्थित स्क्रिप्स मेमोरियल अस्पताल में हार्ट-वॉल्व बदलने के लिए सर्जरी की गई थी। इसी अस्पताल में उन्होंने आखिरी सांस ली। वर्ष 2010 में एशिया सोसाइटी ने रविशंकर को एक सांस्कृतिक विरासत पुरस्कार से नवाजा था।

एशिया सोसाइटी के पूर्व अध्यक्ष विशाखा देसाई ने कहा कि महान संगीतज्ञ रविशंकर का जाना संगीत जगत के साथ-साथ उन सभी के लिए एक भारी नुकसान है, जो राष्ट्रीय और सांस्कृतिक सीमाओं के परे जाकर कला के माध्यम से आपसी रिश्ते बनाने में यकीन रखते हैं।

देसाई ने कहा कि रविशंकर ने दूसरे लोगों की संस्कृतियों के बीच आपसी रिश्ते बनाने का रास्ता दिखाया। अंतरराष्ट्रीय मंच पर वैश्वीकरण का नाम आने से पहले ही रविशंकर और यहूदी मेनुहिन और बीटल्स जैसे कलाकारों ने हमें यह बता दिया था कि कलात्मकता के उच्च स्तर पर समानता के साथ साझेदारियां संभव हैं।

प्रसिद्ध सितारवादक के निधन पर शोक जताते हुए पेटा और पेटा इंडिया ने कहा कि रविशंकर ने अपनी बेटी अनुष्का के साथ पशु संरक्षण नियमों का प्रचार करने वाले विज्ञापनों में काम किया। उन्होंने केएफसी से अपील की थी कि वह अपने रेस्तरांओं के लिए मारे जाने वाले मुर्गी के बच्चों पर शोषण रोके।

पेटा ने कहा कि रवि की याद में पेटा इंडिया को उम्मीद है कि सरकार आज पशु कल्याण कानून 2011 को आज पारित करने के लिए काम करेगी। हर व्यक्ति, जो उनके निधन से कुछ नुकसान महसूस करता है, वह उनकी याद में सड़क के किसी भूखे कुत्ते को भोजन देगा या पर्यावरण और वन मंत्रालय को लिखकर भारत में पशु संरक्षण के नियमों को मजबूत बनाने की अपील करेगा।

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