class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

सिविल सेवा परीक्षार्थियों का राजनाथ के घर पर प्रदर्शन

सिविल सेवा परीक्षार्थियों का राजनाथ के घर पर प्रदर्शन

सिविल सेवा परीक्षा में हुए बदलावों ने हिन्दी भाषी राज्यों उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश की राह में रोड़े अटका दिए हैं। परीक्षा के नए पैटर्न से आर्ट्स के छात्रों, ग्रामीण पृष्ठभूमि के कोचिंग नहीं ले पाने वाले छात्रों और हिन्दी माध्यम से परीक्षा देने वालों के लिए भारी मुश्किल पैदा कर दी है। इसलिए छात्र उत्तेजित हैं। शनिवार को उन्होंने गृह मंत्री राजनाथ सिंह के घर के बाहर प्रदर्शन कर परीक्षा में बदलाव की मांग उठाई।

प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने सरकार को भेजे ज्ञापन में परीक्षा के नए पैटर्न से तीन प्रमुख दिक्कतें बताई हैं। एक, प्रारंभिक परीक्षा से सिविल सर्विसेज एप्टीटूट्यूट टेस्ट (सीसैट) को हटाया जाए, क्योंकि यह पूरी तरह से अंग्रेजी माध्यम से खासतौर इंजीनियरिंग के पाठ्यक्रम पर आधारित है। यह इंजीनियरिंग के साथ-साथ मैनेजमेंट और बैंकिंग के छात्रों के अनुकूल है। हिन्दी माध्यम से स्नातक करने वालों, आर्ट्स पढ़ने वाले छात्रों के लिए यह बेहद जटिल है।

इसी प्रकार जब मुख्य परीक्षा में बदलाव की घोषणा हुई थी तो अंग्रेजी के प्रश्न पत्र को सामान्य स्तर का रखने की बात कही गई थी, जो 10-12वीं के कोर्स के स्तर का रखा जाना था, लेकिन इसे कहीं ज्यादा कठिन एडवांस स्तर का बना दिया गया है। हिन्दी भाषी छात्रों के लिए इसे हल करना कठिन होता है, इसलिए परीक्षा में निकलने की उनकी दर कम हो गई है।

तीसरी समस्या, हिन्दी के प्रश्न पत्र के अनुवाद की है। इसका अनुवाद इतना खराब होता है कि उसे हिन्दी के छात्र ही नहीं समझ पाते। आरोप यहां तक है कि अंग्रेजी के प्रश्न पत्र को गुगल ट्रांसलेटर के जरिये तैयार किया जाता है।

कार्मिक मंत्रालय ने इस मामले को देखने के लिए संघ लोक सेवा आयोग को निर्देश दिया है लेकिन अब तक उसने परीक्षा में बदलावों के लिए किसी प्रकार के कदम का ऐलान नहीं किया है। हालांकि जिस प्रकार से इस मुद्दे पर छात्र उग्र हो रहे हैं, उसके मद्देनजर यूपीएससी को तत्काल कदम उठाने की जरूरत है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:सिविल सेवा परीक्षार्थियों का राजनाथ के घर पर प्रदर्शन