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कॉमर्स से जुड़े व्यावसायिक कोर्स

प्रियंका कुमारी First Published:17-04-2012 01:08:45 PMLast Updated:18-04-2012 05:52:54 PM

रंजना, वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय, आरा, बिहार से बीकॉम अंतिम वर्ष की छात्र हैं। उनकी परेशानी है कि इस साल ग्रेजुएशन पूरी करने के बाद वह एमकॉम न करके कोई ऐसा कोर्स करना चाहती हैं, जिससे उन्हें नौकरी मिलने में आसानी हो। दिल्ली के प्रतिष्ठित एसआरसीसी कॉलेज के प्राचार्य पीसी जैन और केएम कॉलेज, दिल्ली के शिक्षक जेपी महाजन ने कई कॉम्बिनेशन कोर्सेज की जानकारी दी, जिन्हें विस्तार से बता रही हैं प्रियंका कुमारी

देशी-विदेशी बैंक हों या बहुराष्ट्रीय कंपनियां या फिर सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाएं, कॉमर्स की जरूरत आज हर किसी को है। सुबह से लेकर शाम तक चढ़ते-उतरते शेयर बाजार के आंकड़े, बैंकों में जमा पूंजी पर मिलने वाला ब्याज, पैसे कमाने की माथापच्ची या फिर दो के चार बनाने का गुणा-भाग, इन्हें समझने और जीवन में आगे बढ़ने का रास्ता दिखाने वाला कोर्स है कॉमर्स यानी वाणिज्य। बारहवीं में कॉमर्स की पढ़ाई करने वाले छात्र आज बाजार में सिर्फ बीकॉम और एमकॉम की डिग्री लेकर ही नहीं जा रहे, उनके सामने कई ऐसे नए व्यावसायिक कोर्स हैं, जिन्हें करके वे करियर को एक नए आयाम तक पहुंचा सकते हैं।

किरोड़ीमल कॉलेज के शिक्षक जेपी महाजन कहते हैं, आज कॉमर्स के छात्र, जिन्होंने 12वीं में गणित पढ़ी है, बीएससी गणित, स्टेटिस्टिक्स या ऑपरेशनल रिसर्च कर सकते हैं। वह बैचलर ऑफ कंप्यूटर एप्लिकेशंस या बीएससी कंप्यूटर साइंस कर सकते हैं। इनके अलावा लीक से हट कर कई और कोर्स भी हैं, जहां कॉमर्स के छात्रों के लिए राह है।

बीबीएस, बीएफआईए और बीबीई
बीबीएस यानी बैचलर ऑफ बिजनेस स्टडीज एक अंडर ग्रेजुएट मैनेजमेंट प्रोग्राम है। यह कोर्स दिल्ली विश्वविद्यालय के तीन कॉलेजों में चलाया जाता है और इसके लिए ऑल इंडिया स्तर पर प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाती है। अन्य संस्थानों में यह बीबीए नाम से चल रहा है। दाखिले के लिए 12वीं में 60 फीसदी अंक जरूरी हैं। बीबीएस में दाखिले के लिए अंग्रेजी और गणित विषय भी अपेक्षित हैं।

बीएफआईए यानी बैचलर ऑफ फाइनेंशियल एंड इनवेस्टमेंट एनालिसिस फाइनेंस का एक स्पेशलाइज्ड कोर्स है, जिसमें छात्रों को फाइनेंस के विभिन्न पहलुओं के बारे में बताया जाता है। इस कोर्स को बाजार के हिसाब से तैयार किया गया है।

बीबीई का पूरा नाम बैचलर ऑफ बिजनेस इकोनॉमिक्स है। यह बाजार के इस्तेमाल में आने वाले अर्थशास्त्र पर केन्द्रित पाठय़क्रम है। यह परम्परागत अर्थशास्त्र ऑनर्स से इस मायने में अलग है कि इसमें अर्थशास्त्र का इतिहास, उसका विकास और तरह-तरह के सिद्धांतों को नहीं पढ़ाया जाता। बीबीई में आर्ट्स और साइंस के छात्र भी दाखिला ले सकते हैं, लेकिन कॉमर्स छात्रों के लिए यह ज्यादा मददगार है।

बीबीए
बीबीए यानी बैचलर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन अंडर ग्रेजुएट मैनेजमेंट प्रोग्राम है। इसमें छात्रों को बीबीए जनरल से लेकर स्पेशलाइजेशन वाले कोर्स में दाखिले मिलेंगे। स्पेशलाइजेशन में कंप्यूटर एडेड मैनेजमेंट, बैंकिंग एंड इंश्योरेंस, टूर एंड ट्रेवल मैनेजमेंट, मॉडर्न ऑफिस मैनेजमेंट और इंटरनेशनल हॉस्पिटेलिटी आदि हैं।

मसलन इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय में बीबीए और एमबीए में फाइनेंशियल मार्केट के अलावा बीबीए जनरल, बीबीए इन बैंकिंग एंड इंश्योरेंस, कंप्यूटर एडेड मैनेजमेंट, ट्रेवल एंड टूरिज्म मैनेजमेंट कोर्स भी चलाए जा रहे हैं। इसी तरह एमबीए का भी स्पेशलाइज्ड कोर्स है।

शिक्षण संस्थानों में फाइनेंशियल मार्केट में स्नातक स्तर पर बीबीए और फाइनेंशियल मार्केट में एमबीए का भी कोर्स भी शुरू किया गया है। कोर्स में स्टॉक बाजार का माहौल किस तरह का है, किस तरह के प्रबंधन के बीच काम करने की जरूरत पड़ती है, फाइनेंशियल प्लानिंग किस तरह से की जाती है, इन तमाम बातों के बारे में बताया जाता है। कोर्स में दुनिया के अलग-अलग जगहों पर चलने वाले स्टॉक बाजार का प्रबंधन किस तरह का है, इससे भी वाकिफ कराया जाता है। स्टॉक एक्सचेंज की कार्यशैली कैसी है, वह किस तरह निवेशकों के बीच काम करता है, इसकी जानकारी दी जाती है। बीबीए में दाखिले के लिए 12वीं में 50 फीसदी अंकों के साथ पास होना अनिवार्य है। इसी तरह एमबीए में स्नातक 50 फीसदी अंकों के साथ पास होना चाहिए।

एमएचआरडी और एमआईबी
दिल्ली विश्वविद्यालय में मास्टर ऑफ ह्यूमन रिसोर्स एंड ऑर्गनाइजेशनल डेवलपमेंट और मास्टर इन इंटरनेशनल बिजनेस में दाखिला एक पंथ दो काज का रास्ता दिखाता है। दाखिले के लिए छात्रों को अलग-अलग परीक्षा की तैयारी नहीं करनी होती। दोनों कोर्स में एक ही प्रवेश परीक्षा, साक्षात्कार और समूह चर्चा के बाद दाखिला पाने का मौका मिलता है। कॉमर्स विभाग द्वारा प्रोफेशनल कोर्स के रूप में चलाए जा रहे इन कोर्सों में दाखिले के लिए हर साल फरवरी माह में विभिन्न बड़े शहरों में प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाती है।

दोनों मास्टर कोर्स दो साल के हैं। यह एक ऐसा पीजी कोर्स है, जो छात्रों को ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट एंड ऑर्गनाइजेशनल डेवलपमेंट के बारे में खास तौर पर प्रशिक्षित करता है। एमआईबी यानी मास्टर ऑफ इंटरनेशनल बिजनेस के जरिए छात्रों को सिर्फ ग्लोबल बिजनेस की गति को पहचाने की क्षमता ही नहीं दी जाती, बल्कि उसकी समझ, विश्लेषण व कम्युनिकेशन स्किल भी पैदा की जाती है।

एमएफसी
एमएफसी यानी मास्टर ऑफ फाइनेंस एंड कंट्रोल फाइनेंस का स्पेशलाइज्ड कोर्स है। यह वित्तीय योजनाएं तैयार करने और उनकी नीतियां बनाने में छात्रों को विशेष तौर पर प्रशिक्षित करता है। इसके तहत उन्हें प्रबंधकीय नीति बनाने, खासकर ऑर्गनाइजेशनल व्यवहार, मैनेजेरियल अर्थशास्त्र, फाइनेंशियल अकाउंटिंग, फाइनेंशियल सर्विस, इंटरनेशनल फाइनेंस, इंटरनेशनल अकाउंटिंग, इनवेस्टमेंट मैनेजमेंट आदि के बारे में जानकारी प्रदान की जाती है।

जीबीओ
श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स द्वारा संचालित यह दो वर्ष का पीजी डिप्लोमा कोर्स है। इसे चार सेमेस्टर में बांटा गया है। इसमें भारतीय बिजनेस के माहौल, मैनेजरों के लिए अर्थशास्त्र, फाइनेंशियल मैनेजमेंट, मार्केटिंग के सिद्धांत, क्वांटिटेटिव तकनीक, सांस्थानिक मनोविज्ञान और बिजनेस में कंप्यूटर के प्रयोग, ग्लोबल बिजनेस, क्वांटिटेटिव तकनीक, अकाउंटिंग फॉर बिजनेस, ग्लोबल बिजनेस के लीगल पहलू, भारत और विदेशी व्यापार और उनकी नीतियों से परिचय कराया जाता है। छात्रों को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सिस्टम, ग्लोबल व्यापार के लिए डॉक्यूमेंटेशन, मानव संसाधन प्रबंधन और अकाउंटिंग फॉर बिजनेस के बारे में परिचित कराया जाता है। आखिरी साल में छात्रों को बिजनेस पॉलिसी और रणनीतिक प्रबंधन, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय मैनेजमेंट, विदेशों के साथ होने वाले व्यापार की बाधाएं और शर्तो से रूबरू कराते हैं। वैश्विक स्तर पर निवेश प्रबंधन और उसकी प्रक्रिया क्या है, इसके बारे में भी छात्रों को बताया जाता है।

सीए, सीएस
सीए और सीएस कोर्स में भी दाखिले का काम बारहवीं के बाद शुरू होता है। इंस्टीटय़ूट ऑफ कंपनी सेकेट्ररीज ऑफ इंडिया देश में विभिन्न जगहों पर स्थित सेंटरों के जरिए तीन स्तरीय कोर्स कराता है। कंपनी सेक्रेटरी बनने के दो रास्ते हैं। पहला बारहवीं के बाद और दूसरा स्नातक के बाद। बारहवीं पास छात्र को तीन स्तरीय कोर्स करना होता है। पहली स्टेज पर फाउंडेशन, दूसरे पर एग्जिक्यूटिव और तीसरे स्तर पर प्रोफेशनल प्रोग्राम होता है। कुछ ऐसी ही प्रक्रिया सीए के लिए भी अपनाई जाती है। सीए का कोर्स इंस्टीटय़ूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट कराता है। परीक्षा में शामिल होकर दाखिला लेने के लिए इंस्टीटय़ूट की वेबसाइट पर जाकर लेटेस्ट कार्यक्रम देखा जा सकता है। यह कोर्स कॉमर्स के छात्रों को रोजगार की एक अलग राह दिखाता है। यह बारहवीं में कॉमर्स पास या बीकॉम के छात्रों का ज्यादा पसंदीदा है, क्योंकि इसके सिलेबस में कॉमर्स का पार्ट ज्यादा है।

मेटीरियल मैनेजमेंट
यह कोर्स दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉलेज ऑफ वोकेशनल स्टडीज में चलाया जाता है। बीए वोकेशनल कोर्स के रूप में मेटीरियल मैनेजमेंट के तहत तीन अलग-अलग वर्षों में उसके विविध रूपों से रूबरू कराया जाता है। पहले साल में छात्रों को किसी भी कंपनी में परचेजिंग व स्टोर मैनेजमेंट क्या है और यह काम किस तरह से होता है, इसके बारे में समझाया जाता है। इस कोर्स में 12वीं कक्षा के अंकों (बेस्ट फोर) के आधार पर दाखिला दिया जाता है। बीए वोकेशनल के तहत टूरिज्म, ऑफिस एडमिनिस्ट्रेशन एंड सेक्रेटेरियल प्रैक्टिस, मैनेजमेंट एंड मार्केटिंग, स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइज, ह्यूमन रिसोर्स मैनजमेंट एंड मार्केटिंग मैनेजमेंट एंड रिटेल बिजनेस जैसे कोर्स भी चल रहे हैं। इन कोर्सेज में दाखिला बारहवीं की मेरिट के आधार पर मिलता है। दाखिला साइंस और आर्ट्स के छात्र भी ले सकते हैं, लेकिन इन कोर्सों का मिजाज कॉमर्स के छात्रों को आगे बढ़ाने के लिहाज से तैयार किया गया है।

पारंपरिक बीकॉम और एमकॉम से हट कर आज कॉमर्स का छात्र आईटी मैनेजमेंट, हॉस्पिटल, हेल्थ मैनेजमेंट, फाइनेंस, इंश्योरेंस मैनेजमेंट, न्यू एंटरप्राइज मैनेजमेंट, अकाउंट मैनेजमेंट, फाइनेशियल कंट्रोल, रिटेल मैनेजमेंट, सप्लाई एंड चेन मैनेजमेंट और लॉजिस्टिक मैनेजमेंट जैसे कई क्षेत्रों में अपना करियर बना सकता है।
डॉ. पीसी जैन (प्राचार्य, एसआरसीसी)

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