Image Loading मुखर्जी ने आयकर अधिनियम में संशोधन का किया बचाव - LiveHindustan.com
शुक्रवार, 29 अप्रैल, 2016 | 13:36 | IST
 |  Image Loading
ब्रेकिंग
  • EXCLUSIVE: दुनिया के सबसे अधिक अनपढ़ पाकिस्तान में हैंः तारेक
  • आर्थिक पिछडे़पन के आधार पर गुजरात सरकार ने सामान्य वर्ग को दिया 10 फीसदी आरक्षण, 1...
  • केंद्र ने NEET पर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की याचिका, 1 मई की परीक्षा 24 जुलाई को कराने...

मुखर्जी ने आयकर अधिनियम में संशोधन का किया बचाव

कोलकाता, एजेंसी First Published:31-03-2012 07:25:28 PMLast Updated:00-00-0000 12:00:00 AM

केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने शनिवार को कहा कि वोडाफोन जैसे सीमा पार हुए सौदों को कर दायरे में लाने के लिए आयकर अधिनियम में पूर्वगामी प्रभाव के साथ संशोधन करने के सिवा और कोई उपाय नहीं है।

कलकत्ता चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स द्वारा आयोजित एक साक्षात्कार सत्र में मुखर्जी ने कहा, ''मैं आपके सामने एक सीधा प्रश्न रख रहा हूं। आप भारत को बगैर कर वाला देश बनाना चाहते हैं या कर वाला देश बनाना चाहते हैं।''

उन्होंने कहा, ''भारत में स्थित सम्पत्तियों के लेन-देन पर कर लगाया जाए या नहीं। यदि जवाब यह है कि इस पर कर लगाया जाए, तब सवाल यह पैदा होता है कि इस पर भारत में कर लगाया जाए या सम्बंधित कम्पनी के स्रेत पर कर लगाया जाए.. तब सवाल पैदा होता है कि इसे दोहरे कराधान निवारण समझौता या कर हस्तांतरण सूचना समझौता से कैसे बचाया जाए। इसके अलावा और कोई उपाय नहीं है।''

मुखर्जी ने 2०12-13 के बजट में 1962 के आयकर अधिनियम में पूर्वगामी प्रभाव से संशोधन का प्रस्ताव रखा, जिसका वोडाफोन ने विरोध किया।

सर्वोच्च न्यायालय ने वोडाफोन कर मामले में दिए आदेश में कहा था कि भारतीय कम्पनी हचीसन एस्सार में हांगकांग की कम्पनी हचीसन टेलीकॉम की 67 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने पर वोडाफोन पर कर की देनदारी नहीं बनती है, क्योंकि सौदा दो विदेशी कम्पनियों के बीच विदेश में हुआ था।

आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं।
 
 
 
 
 
 
 
देखिये जरूर
जरूर पढ़ें
क्रिकेट स्कोरबोर्ड
क्रिकेट
DJ ब्रावो का ये सपना जानकर आप रह जाएंगे बिल्कुल DJ ब्रावो का ये सपना जानकर आप रह जाएंगे बिल्कुल 'दंग'
कैरेबियाई क्रिकेटर ड्वेन ब्रावो डीजे तो बन ही चुके हैं और अपने गाने 'चैंपियन... चैंपियन...' से खूब वाह-वाही भी बटोर चुके हैं लेकिन अब उनका इरादा कुछ और ही है।